कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 97, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें९८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓࿓ और लिंगमूर्ति के लिए नमस्कार है । आदि और मध्य तथा अन्त स्वरूप, स्वभाव अनल की दीप्ति वाले, शिव, शान्त, ब्रह्म और लिंगभूमि वाले के लिए नमस्कार है । प्रलय के अन्त में विराजमान, प्रलय और स्थिति के कारण, शिव, शान्त, ब्रह्म और लिंगमूर्ति के लिए नमस्कार है । जो परों से भी पर हैं और उससे पर परमात्मा है उसके लिए, शिव, शान्त, ब्रह्म और लिंगमूर्ति के लिए नमस्कार है । ज्वालाओं की मालाओं से समावृत अंगों वाले, विश्व के रूप वाले, शिव, शान्त ब्रह्म और लिंगमूर्ति आपके लिए प्रणिपात समर्पित है । परमार्थ स्वरूप, ज्ञान के दीप अर्थात् प्रकाश करने वाले, वेधा, शिव, शान्त, ब्रह्म और लिंगमूर्ति आपके लिए ओंकार के सहित नमस्कार है । हे दाक्षायणी के पतिदेव! हे मृड! हे शर्व! हे महेश्वर! हे सब भूतों के ईश! हे शिव! हे भगवान् आपके नमस्कार है आप प्रसन्न होइए । हे लोकों के स्वामिन्! हे महेश्वर! आपको शोक के सहित चेष्टा करते हुए होने पर सभी देवगण समाकुल हैं इसलिए आप अब इस शोक का परित्याग कर दीजिए । हे भूतों के ईश! आपको नमस्कार है-नमस्कार है । हे सब कारणों के भी कारण! प्रसन्न होइए । हम सबकी रक्षा करो और शोक का त्याग कर देवें । आपके लिए नमस्कार है । मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-इस प्रकार से भली-भाँति स्तवन किए गए जगत् के पति महादेव अपने रूप में समस्थित होते हुए शोक से आहत प्रादुर्भूत हुए थे । उनकी शोक से विह्वल और बिना चेत वाले अर्थात् मन्य मनस्क प्रादुर्भूत हुए देखकर देवों ने शोक के अपहरण करनेवाले विधि वृषभध्वज की स्तुति कौ थी । ब्रह्माजी ने कहा-हे हर! आप ही हिरण्यबाहु ब्रह्मा हैं और आप ही जगत् के पति विष्णु हैं । इस जगत् की सृष्टि, स्थिति और विनाशों के आप ही हेतु होते हैं । आप अपनी अष्ट मूर्तियों के द्वारा इस सम्पूर्ण चराचर जगत् में व्याप्त होकर इसके उत्पादक-स्थापक और नाशक भी हैं । विश्वकृत! आप ही हैं । हे महादेव! आपकी आराधना करके मुक्ति पाने की इच्छा वाले