कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[Header] सप्तम अध्याय-२ ] [ ३५६
पैदल ही उन पर झपटा ।२८। हाथी पर सवार शत्रु-नाशक कवि ने शुद्धोदन को बाणो से ढक दिया और सिंहवत् गर्जन करने लगे ।२६। धर्मविद् कवि ने शुद्धोदन को गदा लिए पैदल ही युद्ध करते देखा तो वह भी पैदल ही उसके सामने जा डटे ।३०। स तु शुद्धोदनस्तेन युयुधे भीमविक्रमः । गज प्रतिगजेनेव दन्ताभ्यां सगदाबुभौ ।३१। युयुधाते महावीरो गदायुद्ध विशारदौ । कृतप्रतिकृतौ मत्तौ नदन्तौ भैरवान्रवान् ।३२। कविस्तु गदया गुर्व्या शुद्धोदनगदा नदन् । करादपास्याशु तया स्वया वक्षस्यताडयत् ।३३। गदाघातेन निहतो वीरः शुद्धोदनो भुवि । पतित्वा सहसोत्थाय तं जघ्ने गदया पुन ।३४। सताडितेन तेनापि शिरसा स्तम्भित कविः । न पपात स्थितस्तत्र स्थाणुवद्विह्वलेन्द्रिय ।३५। जैसे हाथी शत्रु के हाथी से दाँतो के द्वारा युद्ध करता है, वैसे ही गदाधारी कवि और महापराक्रमी शुद्धोदन गदा-युद्ध मे रत हो गए । युद्ध-मत्त दोनो वीर भयकर शब्द करते हुए परस्पर गदाओ को रोकने लगे ।३१-३२। फिर सिंहनाद करते हुए कवि ने अपने गदाघात द्वारा शुद्धोदन की गदा गिरादी और फिर तुरन्त ही उसके हृदय पर पदाघात किया ।३३। गदाघात को प्राप्त हुआ शुद्धोदन तुरन्त ही पृथिवी पर पडा तथा पुन सहसा उठ कर उसने कवि पर गदाघात किया ।३४। गदा लगने से कवि विकलेन्द्रिय और मूर्च्छित के समान खडे हो गये, परन्तु पृथिवी पर गिरे नही ।३५। शुद्धोदनस्तमालोक्य महासार रथायुतः । प्रावृत तरसा माया-देवीमानेतुमाययौ ।३६। यस्या दर्शनमात्रेण देवासुरनरादयः ।