भारतकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

पृष्ठ 140, कुल 259 में से

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तृतीया अध्याय-३ ] [ ३६३ और पशुओ के साथ सरयू तट पर गये और प्रसन्न हृदय से जल का स्पर्श करके दिव्य विमान मे आरूढ होकर अपने लोक को गये ॥५७॥ कानो के लिए अमृत के समान इस राम चरितामृत को जो आदर सहित सुनेगे उनकी सभी बाधाएँ श्रीराम-कृपा के दूर हो जायेंगी। रोग नष्ट होगे, वंश-वृद्धि, धन-जन की समृद्धि और स्वर्ग रूप ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी। जो इसका पाठ करेगे, उनके लिए यह ससार-सागर शुष्क होकर अत्यन्त आनन्द तथा मोक्ष-रूप परम पुरुषार्थ की प्राप्ति होगी ॥५८॥

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