भारतकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

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पृष्ठ 143

३६६ ] [ कल्कि पुराण

हे प्रभो ! प्रलय का अन्त होने पर आपके नाभिकमल से ब्रह्माजी की उत्पत्ति हुई थी । उन ब्रह्माजी के पुत्र अत्रि हुए । अत्रि के चन्द्रमा, चन्द्रमा के बुध, बुध के पुरूरवा, पुरूरबा के नहुष और नहुष के पुत्र ययाति हुए । उन ययाति ने अपनी पत्नी देवयानी के गर्भ से यदु और तुर्वम नामक दो पुत्रो को जन्म दिया ॥६-१०॥ हे सत्पते ! उन्ही ययाति ने शर्मिष्ठा नाम को पत्नी से द्रह्यु, अनु और पुरु नामक तीन पुत्र उत्पन्न किये । जैसे सृष्टिकाल मे भूतादि के द्वारा पचभूतो की उत्पत्ति होती है, वैसे ही ययाति से इन पाँच पुत्रो की उत्पत्ति हुई ॥११॥ पुरु का पुत्र जन्मेजय हुआ, जन्मेजय के प्रचिन्वान्, प्रचिन्वान् के प्रवीर, प्रवीर के मनस्यु, मनस्यु के अभयदा अभयदा के उरुक्षय उनके त्रयरुणि, त्रयरुणि के पुष्करारुणि, पुष्करारुणि के वृहत्क्षेत्र और वृहत्क्षेत्र, के पुत्र हस्ती हुए । इन हस्ती नामक राजा के नाम पर ही हस्तिनापुर नामक नगर की स्थापना हुई ॥१२-१३॥ अजमीढोऽहिमीढश्च पुरुमीढस्तु तत्सुताः । कजमीढादभूदृक्षस्तस्मात्संवरणात्कुरु ।१४। कुरोः परिक्षित्सुधनुर्जन्हुर्निषध एव च । सुहोत्रोऽभूत्सुधनुषश्चवनाच्च तत कृती ।१५। ततो बृहद्रथस्तस्मात्कुशाग्रादृषभोऽभवत् । तत सत्यजितः पुत्र पुष्पवान्नहुषस्तत ।१४। बृहद्रथान्यभार्यायां जरासन्ध परन्तप । सहदेवस्ततस्मान्सोमापियंच्छु तश्रवा ।१७। सुरथाद्विदूरथस्तस्मात्सार्वभौमोऽभवत्तत । जयसेनाद्रथानोकोऽभूद्यु तायुश्च कोपनः ।१८। हस्ती के तीन पुत्र हुए । उनके नाम अजमीढ, अहिमीढ और पुरुमीढ हुए । अजमीढ़ के पुत्र ऋक्ष, ऋक्ष के सवरण और सवरण के पुत्र कुरु हुए ।१४। कुरु के पुत्र परीक्षित, परीक्षित के सुधनु, जन्हु और निषध—यह तीन पुत्र हुए । सुधनु के पुत्र सुहोत्र और सुहोत्र के पुत्र