भारतकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

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अष्टदश अध्याय-३ ] [ ४६३ पर जल डालती हैं, वैसे ही वे सब स्त्रिया अद्भुत रूप वाली पद्मा के सहित कल्किजी के देह पर जल की वर्षा करने लगी ।२१-२२। जो कल्किजी युवतियो के साथ लीला करने मे निपुण तथा अपनी प्रिया रमा आदि नारियो के साथ विनोद युक्त विहार करने वाले हैं एव जो कल्किजी देवताओ के भी ईश्वर, आदि पुरुष और जगदीश्वर हैं, उन शम्भल ग्राम निवासी भगवान् वासुदेव की जय हो ।२३-२४। पुरुषोत्तम कल्किजी के इस कानो को अमृत के समान प्रिय लगने वाले चरित्र को जो कोई आदर पूर्वक सुनेगे, कीर्तन या ध्यान करेंगे, उन दास्य भाव की कामना वाले सत्पुरुषो के हृदय में भगवान् की प्रीति के अतिरिक्त अन्य किसी की प्रीति या कामना उत्पन्न नहीं होगी । वे यही अनुभव करेगे कि ससार मोक्ष के अतिरिक्त अन्य कोई परमानन्द नही ।२५।