कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें(१) कलिकाल की भीषणता २५७, (२) कल्किका जन्म २६५ (३) कल्कि को शिवजी का शस्त्र-प्रदान २७२, (४) कल्कि का उपदेश २८१ (५) पद्मा की कथा २८८ (६) शुक और पद्मा की वार्ता २६४, (७) विष्णु पूजन विधि ३०१ । ॥ २ ॥ (१) कल्कि का सिंहल गमन ३०८, (२) कल्कि-पद्मा मिलन, ३१६ (३) कल्कि पद्मा विवाह (४) अनन्त मुनि का उपाख्यान ३२६ (५) अनन्त का माया वर्णन ३३६, (३) सभल नारी का दिव्य रूप ३४७, (७) बौद्धो से सग्राम ३५४ । ॥ ३ ॥ (१) स्त्रियो का युद्धार्थ आगमन, ३६३, (२) कुथोदरी का हनन ३७०, (३) मरु और देवापि का आगमन ३७६, (४) चन्द्र वश कथन ३६४, (५) सत्युग का आगमन ४०१, (६) धर्म से कल्कि का सवाद ४०५, (७) कोक-विकोक से युद्ध ४१३, (८) भल्लाट नगर पर आक्र- मण ४२०, शशिध्वज-कल्कि सग्राम ४२८, (१०) शशिध्वज की पुत्री से विवाह (११) शशिध्वज को पूर्व जन्म कथा ४३६, (१२) भक्ति-तत्व वर्णन ४४८, (१३) मणि चोरी की कथा ४५४, (१४) शशिध्वज का वन गमन ४६१, (१५) माया स्तव ४६८ (१३) कल्कि का यज्ञानुष्ठान ४७२, (१७) देवयानी शर्मिष्ठा की कथा ४८१, (१८) कल्कि का वन विहार ४८६, (१६) कल्कि का वैकुण्ठ गमन ४६४, (२०) गगाजी की स्तुति ५०६, (२१) कल्कि पुराण का उपमहार ५०१,