भारतकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

पृष्ठ 75, कुल 259 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 75

३२८ ] द्वितीय अध्याय-२ विद्या प्राप्त कर वन-गमन करने और रावण द्वारा सीता का हरण करने पर आपने वानर सेना को साथ लेकर कुल सहित रावण को मार डाला ।२७। फिर आप यदुकुल जनयि-मयङ्क वसुदेव जी के पुत्र रूप श्रीकृष्ण हुए और अनेक दैत्य-दानवो को मार कर तीनो लोको को पाप-मुक्त किया । इसलिये सभी देवता आपके उस श्रीकृष्ण रूप के चरण कमलो की सेवा मे तत्पर हुए । उसी काल मे आपने ही बलभद्रजी का भी अव- तार धारण किया था ।२८। फिर आपने ब्रह्मा द्वारा निश्चित वेद-धर्म मे अनेक बाधाएँ देख कर मिथ्या प्रपञ्च को नष्ट करने के निमित्त एव प्राकृतिक विषय की अवमानना न करने के उद्देश्य से बुद्ध का अवतार लिया ।२६। अधुना कलिकुलनाशावतारो बौद्धाखण्डम्लेच्छादीनाञ्चवे- दधर्मसेतुपरिपालनाय कृतावतारः कलिकरूपेणास्मान् स्त्री- स्वनिरयादुद्धृतवानसि तवानुकम्पा किमिह कथयामः ।३०। क्व ते ब्रह्मादीनामविदितविलासावतरण क्व नः कामा वामाकुलतममृगतृष्णार्तमनसाम् । सुदुष्प्राप्य युष्मच्चरण जलजालोकनमिद कृपापारावार' प्रमुदितदृशाश्वामय निजान् ।३१। अब आप कलिकुल को नष्ट करने तथा बौद्ध पाखण्डियो और म्लेच्छों पर शासन करने के लिये कल्कि अवतार लेकर वेद धर्म रूपी सेतु की रक्षा कर रहे हैं । आपने ही स्त्रीत्व रूपी नरक से हमारा उद्धार किया है । हम आपकी इस कृपा का वर्णन किस प्रकार करे ? ।३०। ब्रह्मादि देवता भी आपकी लीला को जानने मे समर्थ नही हैं । आपकी अवतार विषयक कोई कामना नही रहती । हम स्त्री के देखते ही काम-बाण के द्वारा जर्जर एव मृगतृष्णा से सतप्त हृदय वाले विषयी प्राणियो के लिये आपके पदाम्बुजो का दर्शन दुष्प्राप्य था । हे अपार कृपा वाले प्रभो ! हम अनुगामियो की ओर आप एक बार अपना कृपा कटाक्ष करके: हमे आश्वासन दीजिये ।३१।

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद) · पृष्ठ 75, कुल 259 में से · BharatKosha