भारतकोश
कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 549 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 108

६८ कंब रामायण्

दृश्य उपस्थित कर रहे थे, तथा उनके घने पुष्प-भारित केश तथा वस्त्र नीचे खिसके पड़ते थे । वह सखी आई तो उसने सीताजी के चरणों का नमस्कार भी नहीं किया और शोर मचाने लगी । असीम आनन्द में भरी हुई वह नाचने-गाने लगी । उसे देख सीता ने पूछा—हे सुन्दरि ! तेरे मन में यह कैसा आनन्द है ? ऐसी क्या बात हुई है जो तू इतना आनन्दित है ? तब वह सखी सीता के चरणों की वंदना कर कहने लगी—

गज, रथ, तुरग के समुद्र से युक्त विपुल विद्या-सपन्न, मेघ-सदृश (दान-वर्षा करनेवाले) करों से युक्त, दशरथ नामक एक छत्रधारी चक्रवर्ती हैं । उनका पुत्र पुष्पबाणों द्वारा प्रेम उत्पन्न करनेवाले मन्मथ से भी अधिक सुन्दर है ।

उस कुमार की भुजाएँ सालवृक्ष के-जैसे बढ़ी हुई हैं । उसे देखने से सन्देह उत्पन्न होता है कि कहीं अनन्त पर शयन करनेवाले विष्णु भगवान ही तो इस रूप में नहीं आये हैं । उसका नाम है 'राम' । वह और उसका अनुज प्रशसनीय मुनिवर विश्वामित्र के संग इस नगर में आये हैं ।

वलय-विभूषित भुजावाला वह महापुरुष शिवजी का धनुष देखने के लिए आया है—यह समाचार विश्वामित्र से पाकर जनक ने वह धनुष लाने का आदेश दिया । वह धनुष लाया गया, तो उस पुरुषश्रेष्ठ ने उस पर डोरी चढ़ा दी । तब देवलोक भी काँप उठा ।

क्षण-भर में उसे पैर से दबाकर अपने भुजबल से ऐसा झुका दिया, मानो उस धनुष को चढ़ाने का उसे पहले से ही अभ्यास रहा हो । तब देवताओं ने उसकी प्रशंसा की और पुष्प-वर्षा की वह धनुष टूटकर ऐसा गिरा कि गजदरबार उस शब्द से काँप उठा ।

उस सखी ने जब यह कहा कि विश्वामित्र के साथ आया हुआ राजकुमार मेघवर्ण है और कमलनयन विष्णु की छटावाला है, तब सीता का यह सन्देह दूर हो गया कि यह वही राजकुमार है जिसे पहले दिन उसने देखा था या कोई अन्य । सीताजी का नितंब (आनन्द से) ऐसा बढ़ गया कि मेखला टूट गई ।

(सीता की यह दशा देखकर सखियाँ आपस में कहने लगी) कोई कहती— 'इनके कटि नहीं है।' तो दूसरी कहती कि 'नहीं, इनके कटि है।' सीता के सुकुमार स्तन उमंग से उभर उठे । यों आनन्दित होती हुई उसने मन में निश्चय कर लिया कि इस सखी के कहे लक्षणों से लगता है कि अवश्य वही राजकुमार है। पर, यदि धनुष तोड़नेवाला व्यक्ति कोई अन्य होगा, तो मैं अपने प्राण छोड़ दूँगी ।

विरह-वेदना से पीड़ित सीता की दशा ऐसी हुई । उधर जनक महाराज ब्रह्मा के द्वारा निर्मित धनुष के टूटने से उत्पन्न ध्वनि सुनकर अत्यन्त आनन्दित हुए और विश्वामित्र से कहा—

'भगवान् ! क्या आप इस कुमार का विवाह अविलम्ब आज ही, कर देना चाहते हैं या संबंध इस प्रकार का दृढ़ीकृत दिखलाकर तथा सुदर्शन वीर-चक्रबड़ारी और गरजनेवाली सेनाश्री-सहित दशरथ चक्रवर्ती को भी यहाँ बुलाने के पश्चात् विवाह संपन्न करना चाहते हैं ? आप कृपया बतावें ।