कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 128, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें११६ कम्ब रामायण
की रमणियाँ) शीतल मधु-भरी मल्लिका-मालाओ को हटाकर सुगन्ध-युक्त तथा घने दलोवाले 'करुमुहै' (वृक्ष) के पुष्पहारो को पहनने लगी।
(उस पर्वत मे) नये-नये (पकड़कर) लाये गये हाथियो को बाँधनेवाले लोग जो गीत रचकर गाते थे, उनका शब्द कही सुनाई पड़ता था, कही मद्य पीकर मत्त हुए पुरुष अपनी प्रेयसियों के साथ जो प्रलाप कर रहे थे, उसका शब्द था, कही वेश्याओं की मेखला का शब्द था और कही मदोन्मत्त गजो के बेसुध हो चिंघाड़ने का शब्द हो रहा था।
रसना के द्वारा अपेय, अमृत-समान रतिशास्त्र के विषय का अनुभव करने, दुर्लभ अमृत-जैसी रमणियो के हृदय मे उत्पन्न मान को दूर करने, राग-युक्त गीतो को श्रवण कर उनके भाव को नयनो के नृत्याभिनय मे देखने आदि कार्यों मे ही (उनलोगों की) वह रात्रि व्यतीत हुई। (१-७७)
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अध्याय १५
पुष्प-चयन पटल
नक्षत्रो से पूर्ण रात्रि-रूपी खड्ग-दतवाले हिरण्यकशिपु पर क्रोध करके, पुञ्जीभूत उष्ण किरण-रूपी सहस्र करों को बाहर निकाले हुए, अपने उदयस्थान भूतपर्वत-रूपी सोने के स्तम्भ से, उज्ज्वल सूर्य-रूपी नरसिंह¹ निकले।
नित्य कर्मो को पूरा करने के उपरात, (दशरथ) चक्रवर्ती ने जब प्रस्थान किया, तब सभी राजा लोगो ने खडे होकर नमस्कार किया। फिर, उनकी सेना-वाहिनी चलकर उस शोण नदी के निकट पहुँची, जिसके तटो के ऊँचे टीलो पर लहलहाते वन थे, टीलो के नीचे तलैयो मे 'ककुनीर' (नामक लताएँ) फैली हुई थी और जिसके घाटो मे कमललताएँ फैली हुई थी।
उस (शोण नदी के) स्थान पर पहुँचकर सारी सेना विश्राम करने को ठहर गई, (उधर) सूर्य भी गगन-मडल के मध्य जा पहुँचा, राजा और राजकुमार अपनी-अपनी स्त्रियो के साथ, स्वच्छ जलाशयों से शोभायमान शीतल तथा सुगंधित उद्यान में, भ्रमरो के विश्राम भूत कोमल पुष्पो का चयन तथा जलविहार करने के लिए गये।
(उस उद्यान में, उन सुन्दरियो को देखकर) मयूर वहाँ से कदाचित् यह सोचकर दूर हट गये कि (वे सुन्दरियाँ) भ्रू-रूपी सुदृढ धनुष के द्वारा अरुण रेखाओं से युक्त काली आँखे-रूपी बाण चलाकर कही उन्हे आहत न कर दें। वे तरुणियाँ जब मञ्जुल नूपुरों को बजाती हुई डग भरती थी, तब हस (पुष्पो के मध्य) छिप जाते और गानेवाले भ्रमर (उन पुष्पो से) गुजन करते हुए बाहर-उड़ जाते थे। ऐसा लगता था, मानो वे हस (उन तरुणियो की पदगति से) लज्जित हो पलायन कर रहे हो।
१. इस पद्य में रात्रि को हिरण्यकशिपु और सूर्य को नरसिंह-रूप बतलाया गया है।