कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 135, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंबालकाण्ड १२३
कि यह सुन्दर ललाटवाली (कोई अन्य नारी है, जो) मेरे हँसने पर हँसती है, अतः मेरी यह सखी है, फिर आनन्द से अपने निर्दोष स्तनों का हार उतारकर उस प्रतिबिम्ब को देने लगी।
भ्रमरों से घिरे पुष्प-हारों से शोभित रमणियाँ (अपने) प्रियतमों की वज्र-सदृश दृढ़ भुजाओं का आलिंगन करने की इच्छा से जलाशय के तट की ओर चलने लगीं, तो वे गगनोन्नत पर्वतों पर रहनेवाले सुकुमार मयूरों के समान लगती थीं। उनके कर्णाभरणों की कान्ति छिटक रही थी और श्रेष्ठ मुक्ताओं का हार (उनके ऊपर) प्रकाशमान था।
न जाने, उस जलक्रीडा के समय (पति के द्वारा) क्या अपराध हुआ, जिससे लाल रेखाओं से युक्त 'कयल' मीन जैसी आँखोंवाली एक सुन्दरी अपनी आँखें (और भी) लाल करती हुई, क्रोध से जाकर कमलवन के भीतर छिप रही और उसका पति यह नहीं पहचान सकने के कारण कि कौन पंकज है और कौन उसकी पत्नी का मुख है, सन्देह-ग्रस्त ही खड़ा रहा।
जब-जब वे सुन्दरियाँ जल में डुबकी लगाकर ऊपर उठती थीं, तब-तब (उनके) पल्लव-समान हाथों के स्वर्ण-कंकण और शंख-वलय भ्रमर के साथ बोल उठते थे। उनके भारी नितम्बों पर से अनेक लड़ियों की मेखलाएँ खिसक जाती और उनके छोटे पैरों से उलझ जाती थीं; तब वे रमणियाँ यह सोचकर कि पैरों में साँप ही लिपट गये हैं, डर से थरथरा उठतीं।
वहाँ वर्तुल अंगदों से भूषित विशाल भुजाओं से शोभायमान, पुष्पमालाधारी एक नृपति जल में मग्न हो क्रीडा करनेवाली नारियों के दल से घिरा हुआ इस प्रकार खड़ा था, जिस प्रकार मंदरपर्वत (क्षीर सागर के) मथन के समय समुद्र से, अमृत के साथ उत्पन्न देवनारियों से घिरा हुआ खड़ा हो।
'तोड़ि' (नामक कंकणों) से शोभित कमल-समान लाल-लाल कर, स्वच्छ हास-युक्त अरुण मुँह तथा लता-समान कटि-सहित सुन्दरियों के मध्य एक राजा इस प्रकार खड़ा था, जिस प्रकार सुगन्धित कमल-भरे किनारोंवाले वन-सरोवर में हथिनियों से घिरा हुआ कोई मत्तगज खड़ा हो।
अरण्य के मयूरों के गर्व को भी मिटानेवाले सौन्दर्य से युक्त तथा निरन्तर बरसने-वाले मेघ की समानता करनेवाले दीर्घ केशों से विभूषित रमणियों के मध्य एक राजा इस प्रकार खड़ा था, जिस प्रकार आकाशगंगा के मध्य अनेक स्थानों में चमकते हुए नक्षत्रों से घिरा हुआ उज्ज्वल किरणोंवाला चन्द्रमा खड़ा हो।
इक्षु का धनुष रखनेवाला बलिष्ठ भुजाशाली (मन्मथ) को (सौन्दर्य) गुण के अतिरिक्त बाण भी देनेवाले दीर्घ नयनों से विभूषित एक सुभ्रू, सखियों के द्वारा अलंकृत होकर, नारियों के मध्य इस प्रकार शोभायमान थी, जिस प्रकार त्रिविध जलज-पुष्पों से प्रकाशित सरोवर में शतदल पुष्प (कमल) शोभित हो।
'ये दृढ़ तथा कठोर शृङ्ग हैं, नहीं, ये तो दमकते हुए प्रवाल हैं'—यों कहने योग्य वदन पर सच्छत्रमान (विशाल) नयनों से शोभायमान एक रमणी मयूर-जैसी सखियों