कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 137, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंबालकाण्ड १२५
चन्दन के धुल जाने पर नख-क्षतो के चिन्हो-सहित दृष्टिगत होनेवाले (उन रमणियो के) स्तन, सुन्दर धागो में लिपटे स्वर्णकलश-जैसे थे। उन कलशो को देखकर कितने पुरुषो के चित्त जल उठे—मै क्या कहूँ ?
चक्रधारी एक नरेश ने अपने दीर्घ घने दलवाले कमल-जैसे हस्त से (कुछ सकेत) प्रकट किया, उसको देखकर 'बीलि' (नामक लाल) फल के समान अधरवाली एक तन्वी ने अपनी सखी के कटाक्ष के द्वारा ही उसका उत्तर दिलाया।
लहरो के आगे ढकेले जाने और उथल-पुथल होने से निर्मल जल मे श्वेत पंकज डूब-डूब जाते थे, मानो वे कमल चितकबरे हरिण की समानता करनेवाली उन (सुन्दरियो) के बदन की सदृशता न कर सकने के कारण ही लज्जित हो अपने को (जल में) छिपा रहे हो।
उपर्युक्त ढंग से जलक्रीडा करने के पश्चात् वीर-वलयधारी पुरुष तथा स्त्रियाँ उस जलाशय से निकलकर, उसको शोभाहीन बनाते हुए किनारे पर आ गईं और योग्य वस्त्रो तथा आभरणो को पहना।
जलक्रीडा के बाद (उनके बाहर) निकल आने से, वह जलाशय उस आकाश के सदृश दीखने लगा, जिसमें से तैरते हुए चन्द्र और नक्षत्र अदृश्य हो गये हो, या अबतक उसमे जो कमल-पुष्प (सुन्दरियो के बदन आदि) विकसित थे, वे अब उससे दूर हट गये हो।
हरिण-सदृश नयनोवाली (रमणियो) ने पुरुषो-सहित जो जलक्रीडा की थी, उसको देखता हुआ उष्णकिरण (सूर्य) मीनो से पूर्ण समुद्र मे समा गया, मानो वह स्वयं भी वैसा ही जलविहार करना चाहता हो।
अपनी निर्बलता के कारण हारकर भी फिर अपने शत्रु पर चढ़ आनेवाले राजा के जैसे ही, सर्वत्र रमणियो के वदनो से पराजित हुआ चन्द्रमा, फिर प्रकट हुआ। (१-३३)
अध्याय १७
मद्यपान पटल
सर्वत्र शीतल ज्योत्स्ना इस प्रकार फैल गई, मानो वह श्वेत रंग के मद्य की बाढ हो, या संगीत ही साकार होकर जगत् में फैल गया हो, या (प्राणियो के) हृदय की कामना बहिर्गत हो गई हो।
सम्मिलित रहनेवाले लोगो (स्त्री-पुरुषो) के लिए सुखदायक मद्य बनकर वियोग का दुःख भोगनेवालो के लिए प्राण-पीडक विष बनकर तथा प्रणय-कलह मे क्रुद्ध व्यक्तियो के लिए सहायक दूत बनकर, वह समृद्ध ज्योत्स्ना मन्मथ की प्रार्थना से सर्वत्र फैलने लगी।
(उस चाँदनी में) सब नदियाँ गंगा नदी के समान दृष्टिगत होती थी, सब समुद्र