कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 142, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें१३० कंब रामायण
के बाणो से सर्वत्र आवृत्त-सी है और शय्या पर बिछाये गये पल्लव झुलस गये हैं।¹ यह देख-कर उसका चित्त विश्रांत हो गया।
एक युवती के स्तन, जो पोते हुए चंदन-लेप को भी तपाकर सुखा देनेवाली उष्णता से भरे थे, ऐसे लगते थे, मानो करवाल का व्यवसाय (युद्ध) करनेवाले किसी कुमार को लक्ष्य करके, 'तुम देश की रक्षा करो' कहकर बडो ने उसके अभिषेकार्थ (स्वर्ण के) जल-कलश रख दिये हों।
एक सुन्दरी ने, जो अपने प्राण-समान नायक के पास स्वयं अभिसार करना चाहती थी, मुखरित मंजीर, विस्तृत मेखला तथा हीरे के बने हुए श्रेष्ठ आभरणो को उतार दिया और अपराधी चन्द्र की ओर झुलसानेवाली दृष्टि से देखा।²
उद्यान की कोयल-जैसी एक सुन्दरी ने कोल्हू मे पडे हुए मृदु गन्ने के समान (काम-व्याधि से पीडित) एक पुरुष को पुष्प के हार से बाँध दिया था, उस पुरुष की वज्र-सदृश भुजाएँ उस बंधन को तोड़ नही सकी। इस पुष्पहार की भी शक्ति कैसी थी ?
घने कुतलोंवाली एक (सुन्दरी) ने अपनी विरह-पीडा को जताने के लिए (चित्र मे स्थित) मन्मथ को देखकर फिर एक (सखी) नारी की ओर देखा। उस (सखी) ने भी उस सुन्दरी का मनोभाव समझकर, मधुस्रावी पुष्पहार धारण करनेवाले (पुरुष) के घर की ओर देखा।³
एक शूलधारी (तथा शत्रुओ के प्रति) क्रोधी राजा के पास, स्वर्ण का कर्णभूषण पहने हुई मयूर-सदृश एक नारी त्वरित गति से जाने लगी। उसे (इस प्रकार आने के लिए) निमन्त्रण देनेवाला दूत कौन था ? मन को द्रवित करनेवाला मद्य था ? रात्रि-काल था ? अथवा मन्मथ ही था ? विदित नही है।
पूर्ण प्रेम के सामने परास्त हो मान करनेवाली अर्धचन्द्र-सदृश ललाटवाली एक (सुन्दरी) ज्योही मेघ-सदृश अपने नयनो से अश्रु बहाने लगी, त्योही प्रियतम ने आकर पूछा कि तुम्हे क्या हुआ है ? तुरत ही वह हँस उठी और मान को छोड़ बैठी।
झुठलानेवाली कटि-युक्त (अति सूक्ष्म कटिवाली) एक सुन्दरी ने मन से अपने प्रियतम को न हटाती हुई भी आलिंगन-बद्ध हाथो को हटा दिया। यह विचित्र कार्य पुरुष को हृदय में लगे शर के समान दुःखदायक था।
एक कोमलांगी अपने प्रेमपात्र सखी का हाथ अपने हाथ मे लिये हुए यह कहना चाहती थी कि तुम (मेरे प्रियतम के पास) दूत बनकर (सन्देश ले) जाओ, किन्तु लज्जा की अधिकता के कारण दीर्घ समय तक मौन रहकर सिसकियाँ भरती खड़ी रही।
१. उसके विरह मे तपती हुई नायिका के शीतोपचार के लिए बिछाये गये पल्लवों की यह दशा थी। इससे नायिका का प्रेमाधिक्य व्यंजित है।
२. यह ध्वनित है कि ओरों से छिपकर अभिसार करने की इच्छा से शब्द करनेवाले आभरणो को दूर कर दिया ओर प्रकाश करनेवाले चन्द्रमा को भी कांतिहीन कर देना चाहा, जिससे सर्वत्र अधकार हो जाय।
३. नायिका का यह संकेत है कि वह मन्मथ के बाणों से पीडित है और सखी उसको बचाये। सखी का सकेत है कि वह उसके प्रियतम को ले आयेगी।