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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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अध्याय २०

प्रसाधन पटल

चक्रवर्ती (दशरथ) अपनी सजीव प्रतिमा-समान सुन्दर देवियो सहित आनन्द भरित हो, इस प्रकार आसीन थे, मानो अपनी देवियो के साथ देवेन्द्र ही विराजमान हो। उस समय वसिष्ठ ने श्वेतच्छत्र तथा नीतिपूर्ण शासन दंडयुक्त जनक को मधुर दृष्टि से देखकर कहा—'आम के टिकोरे-जैसे नयनोवाली (सीता) को ले आइए।'

(वसिष्ठ के) यह कहते ही, (जनक ने) मुनि को प्रणाम किया और मुदित होकर आभूषणो से भूषित कुछ दासियो को आदेश दिया कि वे नारियो की रानी (सीता) को ले आयें। मधु-समान वचनवाली वे स्त्रियाँ, अपार प्रेम से प्रेरित हो, त्वरित गति से गईं और सीता की सखियो को वह समाचार दिया।

(सीता की सखियों ने) यह नहीं सोचा कि आभामय आभरण, सुन्दरी (सीता) के रूप को छिपा देनेवाले ही हैं, जैसे नेत्रों के ऊपर और नीचे उसको छिपाने-वाली दो पलकें सौन्दर्य के लिए रखी गई हैं। उन सखियो ने सौन्दर्य का श्रृंगार किया, मानो अमृत को मधुर बना रही हो। आह। शब्दायमान वीचि-भरे समुद्र से घिरी इस पृथ्वी के लोग भी कैसी अज्ञता से भरे हैं।

शोभा को बढानेवाले (सीता के) कुंतल ऐसे थे, मानो विष्णु (के अवतारभूत राम) का नीलवर्ण, जो उन (सीता) के हृदय मे भरा था, वही उमड़कर ऊपर उठ आया हो और चारो ओर अपनी छवि को फैला रहा हो। मेघ-मध्य विराजमान चन्द्र-कला के समान उस कुंतल-भार के मध्य कोमल फूलो का गजरा रखा।

जैसे विधि के वश हो गगन के नक्षत्र चन्द्र-कला को घेरे रहते ह, वैसे ही चमकते हुए माँग-फूल को (सीता के) ललाट पर बाँधा, चन्द्र को जन्म देनेवाली 'मेघ' नामक माता ने (अपने बछडे को चाटने के लिए) अपनी टेढी जीभ को बाहर निकाला हो—वैसे ही घने अंधकार समान अलको पर वर्त्तुल आभरण (जो माथे पर केशो के किनारे-किनारे पहना जाता है) पहनाया।

गंगा-प्रवाह को जटा मे धारण करनेवाले (शिव) के भयकर धनुष को जिसने तोड़ा, वह वीर क्या वही युवक है, जो मेरे स्त्रीत्व-रूपी अनुपम श्रेष्ठ गुण को चुराकर ले गया है और मुझे विकल छोड़ गया अथवा वह वीर दूसरा कोई है ?—यो सोचती हुई (सीता का) मन जिस प्रकार झूल रहा था, उसी प्रकार झूलनेवाले कान के 'कुलै' नामक आभरण भी उन (सखियो) ने पहनाये।

सीताजी हरिण नयनोवाली सभी नारियो के मगलमय कण्ठो के आभरण-सदृश थी, तो उन (सीता) के कठ का हार कौन हो सकता है ? उस कठ मे, जो ऐसा था मानो विष्णु के द्वारा धारण किया गया शख ही उस रूप मे आ स्थित हुआ हो, (उन सखियों ने) अनेक दोष-रहित आभरण पहनाये।

(सीता के) आभरणो की शोभा को भी बढानेवाले स्तनो पर (पहनाये गये)