कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 161, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंबालकाण्ड १४६
मानो कोई व्यक्ति अलभ्य अमृत को पाकर एकदम सबको स्वयं ही पी जाये और आनन्द से फूल उठे।
घने कुंतलोंवाली सीता ने यह जानकर कि धनुष को तोड़नेवाला कुमार उनके हृदय में स्थित वह 'चोर' ही है, चिन्ता-मुक्त हो गई वह उनकी ममता करने लगी, जिन्होंने जन्म-कारण अविद्या को दूर करनेवाली विद्या को ( तत्त्वज्ञान को ) प्राप्तकर परमात्म-स्वरूप को जान लिया हो और उस ज्ञान के परिणामस्वरूप ब्रह्मानन्द-रूपी फल को प्राप्त कर लिया हो ।
( शत्रुओं के ) विनाश में चतुर हाथियों की सेना से युक्त उस सभा में आसीन चक्रवर्ती ( दशरथ ) ने ज्ञान-सागर के पारंगत मुनि कौशिक को देखकर प्रश्न किया— हे उत्तम ! पुष्पलता-समान सूक्ष्म कटिवाली इस कन्या ( सीता ) के विवाह का अपार शुभप्रद दिन कौन-सा है ? कृपया बतावें ।
'वालै' नामक बड़े मीन तथा 'कयल' नामक छोटे मीनों के उछलने से जहाँ भैंसों के क्रमशः शिर तथा पीठ चिर जाती हैं; जहाँ के, 'वराल' नामक बलिष्ठ मीन ( समीप के नारियल, पूगी आदि पेड़ों के ) विशाल पत्रों को फैलाते हुए उनपर उछल पड़ते हैं, ऐसे खेतों से समृद्ध ( कोशल ) देश के राजन्, विवाह के लिए शुभ दिन कल ही है ।—यों श्रेष्ठतपस्वी ( विश्वामित्र ) ने उत्तर दिया ।
यह वचन सुनने के पश्चात्, दशरथ, तपस्वियों की आज्ञा लेकर वहाँ से चलने लगे । तब अन्य राजे हाथ जोड़कर खड़े हो गये । उनका विलक्षण, रत्न-खचित, घुमावदार विजय-शंख बज उठा, उनके स्वर्ण-किरीट की कांति बालातप के समान छिटक उठी, यों चलकर वे अपने आवास में जा पहुँचे ।
वह हंसिनी ( सीता ) बड़ी कठिनाइयों से वहाँ से चली, तो रामचन्द्र भी वहाँ से चलकर स्वर्ण-प्रासाद रूपी पर्वत के भीतर जा पहुँचे, रत्नाभरण-भूषित राजे भी चले गये, महातपस्वी मुनिगण भी चले गये, उधर उज्ज्वल कांतिमान् सूर्य भी मेरु-पर्वत के तट में अदृश्य हो गया । ( १-४३ )
●
अध्याय २१
शुभ विवाह पटल
प्रख्यातकीर्त्ति जनक महाराज के आतिथ्य के कारण, मदस्रावी गज-सेना से युक्त नरपतियों से ऊँचे कंधोंवाले कनिष्ठ कुमारों तक, सभी ऐसा समझ रहे थे, मानो वे सदेह ही स्वर्ग-लोक की नगरी ( अमरावती ) में आ पहुँचे हों ।
दुर्लभ स्वच्छ जल की प्यास से पीड़ित कोई पिपासु समीप में ही एक विशाल