कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 208, कुल 549 में से
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कंब रामायण
पुत्र के रूप मे प्राप्त करके इस ससार को दिया है, उनका हम क्या प्रत्युपकार कर सकते हैं ?
कोई कहते, इस महानुभाव की कृपा, गजेन्द्र की पुकार को सुनकर मकर के प्राणों का अन्त करनेवाले चक्रधारी नारायण की कृपा-जैसी है । कोई प्रभु के निकट आकर, उनके दर्शन कर, कुछ कारण के बिना ही अपने मनोहर नेत्रो से अश्रु बहाने लगते ।
कोई कहते—प्रभु की गंभीरता और बुद्धि महान् श्याम घन के समान है ; उनका जैसा शील और किसमे हो सकता है ? चिरकाल तक गणना करने योग्य सबसे बड़ी संख्याओ के भी परे जो रहता है, उस अनादि तथा अनंत, अविनाशी मूर्त्ति ( नारायण ) का यह अवतार है । यह देवो में अतर्गत नही है ।
कोई कहते—समुद्र खोदनेवालों की ( अर्थात् सगर-पुत्रो की ), धरती पर गगा नदी को लानेवालो की ( अर्थात् भगीरथ की ), देवो की सहायता करने के लिए असुरो के साथ युद्ध करके उन्हें परास्त करनेवालो की ( अर्थात् इक्ष्वाकु, ककुत्स्थ आदि दशरथ-पर्यंत अनेक सूर्यवंशी राजाओ की ) जो अति प्रवृद्ध कीर्त्ति स्थिर है, वह इस प्रभु ( राम ) की विजयमाला-भूषित भुजाओ की कीर्त्ति के कारण ही अमर बनी है ।
हे वीर राम ! लो, यह चदन है, ये उत्तम रत्न-हार हैं। यहाँ तिलक एव सर्व आभरणो से भूषित मत्तगजो की श्रेणियाँ हैं। ये अश्व-पक्तियाँ हैं। ये पीत-स्वर्ण की निधियाँ हैं, निर्धन लोगो को इनका दान दो—यो कहकर कोई उन वस्तुओ की पक्तियाँ लगाते थे।
विद्युत्-समान रथ पर सवार होकर जब रामचन्द्र आ रहे थे, ऐसे द्रवितचित्त हो खडे थे, जैसे कोई गाय अपने बछड़े को अकेले छलाँग मारकर आते हुए देखकर प्रेम से द्रवितमन होती है ।
कुछ सद्गुण-सम्पन्न यह कहते कि श्वेतच्छत्र की छाया किये, बड़ी सेना रखे, विविध शस्त्र धारण किये जो राजा भूमि का शासन करते हैं, उनका अब ( राम जैसे व्यक्ति के उत्पन्न होने के पश्चात् ) पुत्रो को जनना व्यर्थ है, और चित्र-लिखित मूर्त्ति-जैसे स्तब्ध खडे रहते ।
विद्युत्-से शोभायमान श्याम घन जैसे वक्ष पर यज्ञोपवीत से शोभायमान राम, क्या रथ पर शीघ्रता से मार्ग पार करता हुआ जायगा ? ( राम के ) रथ की गति को मंद करने के लिए अनेक स्वर्णराशियो और विविध रत्नो से मार्ग को भर दीजिए—यो कहते हुए कुछ लोग मार्ग पर ( स्वर्ण, रत्न आदि ) बिखेर रहे थे ।
कुछ लोग कहते—यह अपनी माता की गोद मे नही पला, किन्तु पूर्वजन्म के पुण्य से इसका पालन करनेवाली है कैकेयी, अतएव वह ( कैकेयी ) समस्त पृथ्वी का शासन इसे देकर आनदित हो रही है । ऐसा करनेवाली उम ( कैकेयी ) का आनन्द किस प्रकार का है ! हम क्या कहे ?
कुछ कहते—अब पाप और दुःख समूल मिट जायेंग। कुछ कहते—भूमडल पर अब एक व्यक्ति का स्वत्व नही रहा, वह सब लोगो का हो गया। कुछ कहते—यह देवताओ के शत्रु राक्षसो को मिटा देगा और कुछ कहते—इसकी आज्ञा का पालन करने-वाले राजाओं का भाग्य कितना महान् है !