कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 210, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें| २०० | कंब रामायण |
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रहो। वहाँ पवित्र नदियों में स्नान करते हुए चौदह वर्ष व्यतीत करो और उसके पश्चात् लौट आओ।
किसी के लिए अवर्णनीय गुणोंवाले रामचन्द्र के सुन्दर मुख-मंडल की उस समय जो शोभा थी, उसका कथन करना हम जैसे लोगों के लिए सुलभ नहीं है। उस मुख-शोभा ने, जो सदा कमल की सुषमा की जैसी रहती थी, कैकेयी के यह वचन सुनकर सद्योविकसित अरुण कमल को भी परास्त कर दिया (अर्थात्, कमल की शोभा से भी अधिक राम के वदन की शोभा बढ़ गई।)
रामचन्द्र पहले विशुद्ध ज्ञानवाले चक्रवर्ती की आज्ञा का उल्लंघन होने से डरकर ही इस अंधकारमय संसार के राज्य के दुःख को स्वीकार करने के लिए सन्नद्ध हुए थे। अब वे उस भार से मुक्त होकर ऐसे लगे, जैसे कोई वृषभ, जो चक्रवाले शकट में स्वामी के द्वारा जोता गया हो, पर किसी करुणामय व्यक्ति के द्वारा बंधन से छुड़ा दिया गया हो।
यदि यह चक्रवर्ती की आज्ञा न भी हो, फिर भी क्या आपकी आज्ञा मेरे लिए पालनीय नहीं है ? मेरे भाई ने ऐश्वर्य पाया, तो मैंने भी तो उसे पा लिया। अतः, इससे बढ़कर मेरा हित और क्या हो सकता है ? इस आज्ञा को मैंने शिरोधार्य किया। मैं अभी बिजली की जैसी धूप से युक्त अरण्य में जाऊँगा। आपसे विदा भी ले रहा हूँ। (१-११०)
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अध्याय ४
नगर-निष्क्रमण पटल
पर्वत से भी ऊँचे कंधोंवाले राम ने ऐसे वचन कहकर कैकेयी के चरणों को पुनः नमस्कार किया। पिता दशरथ जिस स्थान में रहते थे, उस दिशा की ओर मुख करके नमस्कार किया और स्वर्ण-कमल पर आसीन लक्ष्मी तथा भू-देवी के रोते हुए, वे कौशल्या के आवास में पहुँचे।
कौशल्या देवी जब यह सोचती हुई बैठी थीं कि मेघों के आवासभूत पर्वत-जैसा मेरा राम, किरीट धारण करके आयेगा, तब राम ढुलनेवाले चामर और श्वेतच्छत्र के बिना ही, विधि के अपने आगे-आगे जाते हुए और धर्मदेव के अपने पीछे-पीछे आते हुए, अकेले ही, कौशल्या के सम्मुख जा पहुँचे।
'इसने किरीट नहीं पहना है, इसके केश तीर्थों के पवित्र जल से भींगे नहीं हैं, इसका कारण क्या हो सकता है ?'—इस प्रकार आशंकित होनेवाली उस (कौशल्या) के चरणों को स्वर्णमय वीर-वलयधारी राम ने प्रणाम किया। उस देवी ने चिंतित मन के साथ उन्हें आशीर्वाद देकर पूछा—'सोंचा हुआ काय क्या हुआ ? क्या राजतिलक में कोई विघ्न उत्पन्न हुआ ?