भारतकोश
कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 549 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 23

बालकाण्ड ९


अंधकार अत्र दो पक्षों में विभक्त होकर इन भैसों के भयंकर रूप में आ गया हो और लड़ रहा हो; उस युद्ध को देखनेवाले दर्शक जब प्रसन्नता से अट्टहास कर उठते हैं और सिर हिलाने लगते हैं, तब उनके सिर के फूलों पर बैठे हुए भ्रमर गूँजते हुए उड़ जाते हैं वहाँ जो कोलाहल होता है, उसका शब्द मेघ-मंडल तक गूँज उठता है।

किसान खेतों को हल से जोतते हैं, वे बड़े-बड़े बलवान् बैलों को जोर-जोर से हाँक लगाते हुए ललकारते हैं; उनकी ललकारों की गंभीर ध्वनि से कमल के नाल टूट-टूटकर गिर जाते हैं; मोती और सोना धरती से फूट निकलते हैं; मणियाँ बिखर जाती हैं : ‘चलंचल’ नामक सीप मुँह खोलकर रो उठते हैं; हल की धारियों में तैरती हुई मछलियाँ छटपटाती हुई उछल पड़ती हैं; कछुए अपने पैरों और सिर को अपने पेट में समेटकर निःस्तब्ध हो पड़ जाते हैं और मीन खेतों से भागकर नालों के गहरे जल में छिप जाते हैं।

बड़ी-बड़ी नौकाएँ, जो अमूल्य वस्तुओं को लेकर विदेशों में गई थीं और वहाँ अपने बोझ उतारकर वापस लौट आई हैं, समुद्र-तट पर पड़ी हैं, मानो भारी बोझ ढोने से दुखती हुई अपनी लंबी पीठ को आराम दे रही हों। ये नौकाएँ भी उस पृथ्वी के ही समान दीखती हैं, जो मनु-नीति का अनुसरण करनेवाले, उचित स्थान पर क्रोध दिखानेवाले, दंड का भी उचित प्रयोग करनेवाले, इच्छारहित, धर्मज्ञ और प्रजावत्सल राजा के द्वारा सुरक्षित होने के कारण पाप-भार से मुक्त हो गई हो।

धान की कटी बालियों का ढेर आसमान को छूता हुआ पड़ा हैं : कृषक लोग, (हाँकनेवाले के) संकेतों को समझकर चलनेवाले बैलों के द्वारा उन बालियों की दौनी करके धान निकाल लेते हैं; दरिद्रों को दान देने के बाद बचा हुआ धान गाड़ियों में लादकर अपने घर ले जाते हैं, जिससे अतिथियों तथा कुटुम्ब के संग वे भरपेट भोजन कर सकें। गाड़ियाँ जब धान लादकर चलती हैं, तब भार के मारे पहिये धँस जाते हैं, मानों धरती भी उस बोझ के आगे अपनी पीठ मरोड़ रही हो।

उस देश में सभी आवश्यक पदार्थ उपजते हैं; धान के खेतों में धान, महँकते बागों में पके फल, बाँगर भूमि में चना आदि अनाज, लताओं में फल, कंद-मूल—जो मिट्टी के भीतर से खोदकर निकाले जाते हैं—आदि वहाँ पर होते हैं, जिन्हें कृषक उसी प्रकार बटोर लेते हैं, जिस प्रकार भ्रमर पुष्पों से मधु को एकत्र कर लेते हैं।

उस देश के सभी प्रान्तों में अन्न का सदाव्रत बड़ी धूम से चलता है; ब्राह्मणों को भोजन देने के उपरान्त गृहस्थजन अपने अतिथियों तथा बंधुओं के साथ स्वयं भोजन करते हैं. भोजन के पदार्थ में तीन श्रेष्ठ फल १ (आम, कटहल और केला), विविध रसमय दाल, उस दाल को डुबो देनेवाला घी, लाल-लाल दही के टुकड़े, खाँड़ इत्यादि होते हैं और इन व्यंजनों से घिरा हुआ भात होता है।

भ्रमर उस प्रदेश में निरन्तर निवास करते हैं, क्योंकि वहाँ की कामिनियों के


१. तमिल देश के तीन प्रधान फल हैं—आम, कटहल और केले। इन्हीं तीन फलों का वर्णन तमिल-साहित्य में प्रायः मिलता है।