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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

पृष्ठ 259, कुल 549 में से

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पृष्ठ 259

अध्याय ८

चित्रकूट पटल

हमारे लिए पूज्य देवताओ तथा हम जैसे मनुष्यो के लिए जो एक समान ही अविज्ञेय हैं, वैसे अनघ, सुन्दर नयनोवाले तथा सहस्र नामवाले अमल विष्णु (के अवतार राम), यौवन से परिपूर्ण कलापी-तुल्य जानकी को चन्दन-वृक्षो से भरे, स्वर्ण से पूर्ण उस (चित्रकूट) पर्वत की प्राकृतिक शोभा दिखाने लगे।

करवाल तथा बरछा—दोनो एक साथ रखे गये हो, ऐसे लगनेवाले नयनो से युक्त (हे सीता)। इस पर्वत के पाद-प्रदेश मे एला की लताएँ तथा तमाल फैले हैं। इस पर्वत की सानुओ पर सोनेवाले दीर्घ तथा जल से भरे मेघों एवं हाथियो मे कोई भेद ज्ञात नही होता।

हे रक्त लगे करवाल-जैसे लाल रेखाओ से युक्त नयनोवाली! इस उन्नत पर्वत पर उछल-कूद करनेवाला पहाड़ी बकरा, (विष्णु के प्रतिपादक) वेदो १ के समान शोभायमान मरकत रत्नो के कान्ति-पुंज से आवृत होकर सूर्यदेव के हरितवर्ण अश्व के समान दिखाई पड़ता है।

रत्नहार से भूषित स्तनोवाली हे कलापी! मत्तगजो को निगलनेवाले विशाल उदरवाले अजगरो की केचुलियाँ बाँसो के झुरमुटो मे लगी हुई हिल रही हैं। वे (केंचुलियाँ) उद्यानो से घिरी अयोध्या के सौधो पर फहरानेवाली श्वेतपट-युक्त ध्वजाओ-सी लगती हैं।

लवण-समुद्र से उत्पन्न न होकर क्षीर-समुद्र मे से उत्पन्न अमृत-समान हे सुन्दरी! (पर्वतो के) प्रवालमय सानुओ मे यत्र-तत्र कवरीमृगो के बाल हिलते हुए ऐसे दिखाई पड़ते हैं, जैसे निर्भर बह रहे हों। उनको देखो।

क्रोध से भरे सिंह से आहत होकर मत्तगज के गिरने पर उसके रक्त के साथ उसके सिर से जो गजमुक्ता बिखर पड़ती हैं, वे प्रणय-कलह मे मानिनी स्त्रियो के द्वारा फेंके गये रक्त-चंदन लगे मोती-जैसे लगते हैं।

इस पर्वत के शिखर पर जब चंद्रमा दिखाई पड़ता है, तब इस पर्वत के पद्मराग रत्नो की कांति जटाजूट का दृश्य उपस्थित करती हैं। इसके उज्ज्वल निर्भर गगा की समता करते हैं। इस प्रकार, यह पर्वत वृषभ पर आरूढ होनेवाले भगवान् (शिव) के समान लगता है।

हाथियो को निगलनेवाले अजगर (उन हाथियो के मद-जल प्रवाह को न सहकर) उनको अपने उज्ज्वल माणिक्यो के साथ ही छोड़कर चले जाते हैं। तब शिलाओ पर 'वेंगे' (नामक वृक्ष के सुनहले) पुष्पो के साथ पड़े हुए वे माणिक्य उन हाथियो के सुखपट्ट का दृश्य उपस्थित करते हैं।


१. विष्णु का रग श्यामल है, अत उनका वर्णन करनेवाले वेदो का रग भी श्यामल माना गया है।

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