कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 265, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंअयोध्याकाण्ड २५५
फिर अग्रज ( राम ) ने अपने छोटे भाई को देखकर कहा-संसार में प्राप्त होनेवाली सम्पत्ति सीमाबद्ध होती है। किन्तु, भविष्य में अपार आनन्द उत्पन्न करनेवाले हमारे इस वनवास-रूपी सुख के बारे में विचार कर देखो। इसमें क्या कमी है ?
दृढ धनुर्धारी रामचन्द्र अपने अनुज को सान्त्वना देकर, देवों की स्तुति प्राप्त करते हुए, अपने व्रत का पालन करते रहे। उधर महान् तपस्वी ( वसिष्ठ ) की आज्ञा से ( केकय देश को ) गये दूतो का क्या हुआ--अब हम उसका वर्णन करेंगे। ( १-५८ )
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अध्याय ६
चिता-शयन पटल
असत्य-रहित अनुपम दूत, जो अयोध्या से चले थे, रात-दिन वेग से चलकर ( केकय देश में ) भरत के भवन में पहुँचे। वहाँ पहुँचकर द्वार-रक्षकों से कहा--द्वाररक्षको। राजा भरत को हमारे आगमन का समाचार दो।
'आपके पिता का समाचार लेकर दूत आये हैं।'-यह वचन सुनकर भरत अत्यन्त आनन्दित हुआ और प्रेमाधिक्य से उन दूतों को अपने निकट लाने की आज्ञा दी। जब वे दूत निकट जाकर नमस्कार करके खड़े हुए, तब भरत ने कहा-मुकुटधारी चक्रवर्ती, किंचित् भी कष्ट के बिना सुखी हैं न ?
दूतों ने कहा-'चक्रवर्ती शक्तिशाली हैं।' यह सुनकर आनन्दित हो फिर भरत ने प्रश्न किया--मेरे प्रभु ( राम ) के साथ आभरण-भूषित अनुज ( लक्ष्मण ) अक्षुण्ण वैभव से युक्त हैं न ? दूतों ने 'हाँ' कहा। तब भरत ने राम को उद्दिष्ट करके अपने शिर पर हाथ जोड़े।
फिर, यथाक्रम सब बंधुओ के समाचार सुनकर भरत आनन्दित हुए। तब दूतो ने भरत से यह कहकर कि चित्रित करने के लिए असाध्य रूप से सम्पन्न हे भरत ! चक्रवर्ती का यह श्रीमुख ( अर्थात्, चिट्ठी ) है, पत्र दिया।
उनके यह कहने पर भरत ने उस पत्र के प्रति नमस्कार किया और उठकर अपने स्वर्ण-आभरण से भूषित दीर्घ कर में उसे लिया और द्रवित-चित्त होकर सद्योविकसित पुष्पो से भूषित अपने शिर पर उसे रख लिया।
यों शिर पर रखने के पश्चात् भरत ने, ऊपर से चंदन से लिप्त मिट्टी लगाकर बंद किये गये उस पत्र के चोगे को खोलकर देखा। उसका समाचार पढ़कर उन दूतो को कोटि से भी अधिक धन दिया।
तब भरत इस उमंग में कि वे अपने ज्येष्ठ भ्राता के दर्शन करनेवाले हैं, उज्ज्वल कांति फैलानेवाली हँसी से युक्त हुए, पुलकित हुए और उस पत्र पर सद्यः तोड़कर लाये गये पुष्प डाले।