कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंबालकाण्ड १३
उपस्थित रहते हैं; विवाह-मंगल में व्यस्त युवकों के घरों में उस समय के अनुकूल मंगल-वाद्य बजते रहते हैं; और, संगीत-कला-निपुण 'बाण' (एक गायक जाति) लोगों के घरों में घुमावदार 'किल्लै' (एक प्रकार की वीणा)-वाद्य विद्यमान रहते हैं।
वहाँ पुष्प-मालाएँ शीतल नव मधु बरसाती हैं; जल-पोत उत्कृष्ट रत्नों को (विदेशों से लाकर) बरसाते हैं. हवाएँ प्राणों को स्थिर रखनेवाला अमृत बरसाती हैं और कवियों की वाणी कर्ण-पेय मधुर कवित्व रस बरसाती हैं।
पुष्पों से अलंकृत केशों और मुक्ता-मालाओं से भूषित वक्षों से अतिरमणीय दिखनेवाली कामिनियों को उद्यानों में देखकर बड़े कलापवाले मयूर भ्रम में पड़ जाते हैं कि वे भी मयूरी हैं और इसलिए युवकों के मन के जैसे ही वे मयूर भी उनके पीछे-पीछे चलने लगते हैं।
उस देश में दान का महत्त्व नहीं, क्योंकि वहाँ कोई भी याचक नहीं है; शूरता का महत्त्व नहीं, क्योंकि वहाँ युद्ध नहीं होते; सत्यवचन का महत्त्व नहीं, क्योंकि वहाँ कोई कभी असत्य-भाषण नहीं करता; और, पंडितों का भी महत्त्व नहीं, क्योंकि वहाँ के सभी लोग बहुश्रुत तथा ज्ञानी हैं।
तिल, जौ, माष, कुलत्थी आदि धान्यों से भरी हुई गाड़ियाँ और नमक के खेतों से नमक लादकर लानेवाली गाड़ियाँ, वहाँ की गलियों में पहुँचकर एक दूसरे की कतारों में इस प्रकार खो जाती हैं कि उन्हें अलग-अलग पहचानना कठिन हो जाता है।
वहाँ के विभिन्न प्रान्तों में उत्पन्न होनेवाले खाँड़, शहद, दही, मद्य आदि पदार्थ दूसरे प्रान्तों में यों स्थानान्तरित होते रहते हैं, जैसे मोक्ष-प्राप्ति के उपाय से वंचित प्राणी अपने किये कर्मों के फल भोगते हुए विभिन्न जन्म ग्रहण कर भटकते रहते हैं।
यज्ञों को देखने के लिए आई हुई जन-मंडली और मेलों को देखने के लिए आई हुई जन-मंडली—दोनों, संगीत और बाँसुरी की ध्वनियों से प्रतिध्वनित होनेवाली गलियों में इस तरह मिल जाती हैं, जैसे अलग-अलग दिशाओं से बहती हुई दो नदियाँ एक स्थान पर आकर मिल जाती हों।
शंख-ध्वनि, मृदंग का नाद, पटहों का रव आदि स्वर, खेतों में बड़े-बड़े बैलों को हाँकनेवाले कृषकों की हाँक में समा जाते हैं।
माताएँ अपने नन्हें बच्चों को दूध पिलाकर अपने हाथ से अन्न उठाकर खिलाती हैं. उन बच्चों के मुँह से लार उनके वक्ष पर गिरती है, जहाँ (विष्णु भगवान् के) पाँच आयुधों के चिह्नोंवाली माला पड़ी है, अन्न उठाते समय उन नारियों के मुकुलित होनेवाले कर यों दीखते हैं, जैसे चन्द्र की कांति से पंकज मुकुलित हो रहे हों।
वहाँ के लोग शीलवान् हैं, इसलिए उनका सौन्दर्य नित नवीन रहता है; वे सत्यवादी हैं, इसलिए वहाँ नीति स्थिर रहती है; वहाँ स्त्रियों का आदर होता है, इसलिए धर्म सुरक्षित रहता है; और, वर्षा समय पर होती है, क्योंकि वहाँ की स्त्रियाँ पवित्र आचरणवाली हैं।
उस विशाल कोशल देश की, जो उपवनों से घिरा हुआ है, सीमा का पता कोई