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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 274

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कंब रामायण

(राम के प्रति ऐसा) क्रूर कृत्य करनेवाले सब लोग अभीतक मिटे नहीं हैं। इस सम्बन्ध में हम क्या कहे ? क्रूरा (कैकेयी) के गर्भ में उत्पन्न मैं प्राण त्याग करूँगा और अपने मन की पीडा को दूर करूँगा। भरत ने पीडित होकर यों कहा।

मरकतमय पर्वत के जैसे बढ़े हुए कंधोंवाले भरत ने फिर कहा—रथ पर आरूढ होकर संसार के अंधकार को दूर करनेवाले उस सूर्य से लेकर उज्ज्वल प्रकाश-युक्त इस पुरातन राजवंश में भरत नामक एक अपयशकारी कलंक भी उत्पन्न हुआ।

जानु तक लंबमान दीर्घ भुजाओंवाले धर्म-स्वरूपी भरत ने पुनः आगे कहा—करवालधारी दशरथ स्वर्ग सिधारे। उनके अनुपम ज्येष्ठ कुमार वन को सिधारे। ऐसे अवलंबों से रहित होकर यह कौशल देश घोर दुःख से पीडित होनेवाला है।

कुलीनता, क्षमा, पातिव्रत्य, इन गुणों से पूर्ण कौशल्या ने रोनेवाले पुरुषवर भरत को देखा और यह जानकर कि भरत में राज्य पाने की इच्छा नहीं है, उसका मन कलंक-रहित है, इसलिए उनका (भरत पर संदेह के कारण उत्पन्न) क्रोध दूर हो गया। फिर वे अधीर होकर बोलीं—

उन कौशल्या ने यह जाना कि भरत का निष्कलंक मन अपराध-जन्य पीडा से मुक्त है। अतः, उन (भरत) से बोलीं कि हे तात ! कदाचित् तुमको कैकेयी का छल विदित नहीं था।

कौशल्या के चरणों पर गिरे हुए भरत, उनके वह वचन सुनते ही, पकड़े गये सिंह के समान घबराकर उठे और रोते हुए ऐसी शपथें खाने लगे कि नित्य प्रवर्धमान धर्म-देवता भी उनकी बात सुनकर काँप उठा।

धर्म का विनाश करनेवाला, किंचित् भी दया से रहित, दूसरों के द्वार पर (उसकी नारी का अपहरण करने के लिए) खड़ा रहनेवाला, दूसरों पर क्रोध करनेवाला क्रूरता के साथ संसार के प्राणियों को मारकर जीवित रहनेवाला, विरागी महातपस्वियों के प्रति क्रूर कार्य करनेवाला,

'कुरा' आदि पुष्पों से भूषित केशोंवाली युवती को करवाल से मारनेवाला, राजा का साथी बनकर युद्ध-क्षेत्र में जाकर फिर भय से शत्रुओं को पीठ दिखाकर भागनेवाला, भिक्षा में स्वल्प धन माँगकर हाथ में रखनेवाले से उस धन को छीननेवाला,

पुष्ट तथा शीतल तुलसी की माला से भूषित भगवान् (विष्णु) के बारे में 'वह भगवान् परम तत्त्व नहीं है'—ऐसा वचन कहनेवाला, धर्म-मार्ग से न हटनेवाले ब्राह्मणों के प्रति अपराध करनेवाला तथा अपौरुषेय एवं त्रुटिहीन वेदों के संबंध में यह कहनेवाला कि 'कई व्यक्तियों की कल्पना-प्रसूत रचना ही वेद है',

अपनी माता के भूखी रहते हुए, स्वयं अपने पापिष्ठ उदर-कुहर को अन्न से भरने-वाला, अपने स्वामी को युद्ध-भूमि में छोड़कर भागनेवाला, ये सब लोग जिस नरक की आग में गिरते हैं, (यदि कैकेयी के षड्यन्त्र में मेरा भाग रहा हो, तो) मैं भी उसी नरक में गिरूँ।

अपने प्राणों के भय के कारण शरण में आये हुए की रक्षा न करनेवाला तथा धर्म को विस्मृत करके आचरण करनेवाला, जो नरक पाते हैं, उसी में मैं भी गिरूँ।