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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 275

अयोध्याकाण्ड २६५

न्यायालय में झूठी साक्षी देनेवाला, युद्ध से डरकर भागनेवाले व्यक्ति के हाथ की वस्तुओं को स्वयं छिपकर छीन लेनेवाला, विपदा में पड़कर पीड़ित हुए व्यक्ति को और अधिक पीड़ा देनेवाला—ये लोग जिस नरक को पाते हैं, उसी में मैं भी गिरूँ।

ब्राह्मणों के निवास को आग से जलानेवाला, बालकों की हत्या करनेवाला, न्यायालय में (न्यायाधीश के पद से) दोषपूर्ण न्याय करनेवाला, देवताओं की निन्दा करनेवाला—ये लोग जो नरक पाते हैं, उसी में मैं भी पडूँ।

बछड़े को दूध पीने न देकर, उसको भूखा ही रखकर गाय का सब दूध दुहकर स्वयं पीनेवाला, भीड़ में दूसरों की वस्तुओं को चुरानेवाला, दूसरों के किये हुए उपकार को भूलकर उनकी निंदा करनेवाला, न्यायहीन जिह्वा से युक्त व्यक्ति—ये जो नरक पाते हैं, (अगर कैकेयी के षड्यंत्र में मेरा भाग रहा हो, तो) मुझे भी वही नरक मिले।

यात्रा में अपने साथ आनेवाली मधुरभाषिणी नारी के दूसरों के द्वारा सताये जाने पर स्वयं अपने प्राणों की रक्षा करने के लिए उसे छोड़कर भाग जानेवाला, अपने पास रहनेवाले भूखे व्यक्तियों की भूख मिटाये बिना स्वयं भोजन करनेवाला—ये सब जिस दुर्गति को प्राप्त होते हैं, वही दुर्गति मेरी भी हो।

(यदि मेरे कहने से मेरी माँ ने राम को वन भेजा हो, तो) शस्त्रों से सुसज्जित होकर युद्ध करने के लिए युद्धक्षेत्र में जाकर अपने प्राणों के मोह में पड़कर शत्रुओं के सम्मुख युद्ध न करके शिर झुका देनेवाला तथा धर्म की सीमा लाँघकर (प्रजा से) धन संग्रह करनेवाला राजा—जो नरक पाते हैं, वही नरक मुझे भी मिले।

(यदि कैकेयी के षड्यंत्र में मेरा भी हाथ रहा हो, तो) उत्तम राज्य को पाकर मनमाना आचरण करते हुए नीच कार्य करनेवाले राजा के समान ही मैं भी परंपरा से प्राप्त धर्म का त्याग कर अपयशकारक अधर्म-मार्ग में चलनेवाला हो जाऊँ।

जो राजा, अपनी रक्षा में रहनेवाली प्रजा के व्याकुल होकर अस्त-व्यस्त होते हुए, 'वंशि' पुष्पों की विजयसूचक माला पहने हुए, शत्रु के सम्मुख 'वाहे' पुष्पों की माला¹ पहनकर खड़ा हो, उसकी जो दुर्गति होती है, वही दुर्गति मेरी हो।

(यदि कैकेयी के षड्यंत्र में मेरा भाग रहा हो, तो) कन्या का मान-भंग करने का प्रयत्न करनेवाला, गुरु-पत्नी की ओर कामुक दृष्टि डालनेवाला, मद्यपान करनेवाला, क्षुद्र चौर्य-कर्म से स्वर्ण प्राप्त करनेवाला (अर्थात्, सोना चुरानेवाला)—ये लोग जैसी दुर्गति पाते हैं, मैं भी वैसी ही दुर्गति पाऊँ।

उत्तम भोजन पदार्थ को कुत्ते-जैसे (अर्थात्, दूसरों से छिपाकर अकेले ही) खानेवाला, 'यह पुरुष नहीं, स्त्री भी नहीं है, यह शक्तिहीन नपुंसक है'—ऐसे अपयश का भाजन बनकर निर्लज्ज हो क्षुद्र कार्य करता हुआ जीवन व्यतीत करनेवाला, महात्माओं का कथन भूलकर सदा पापकर्म में रत रहनेवाला तथा सर्वदा दूसरों की निन्दा करते रहनेवाला—ये सब जो नरक पाते हैं, वही मुझे भी मिले।


¹ 'वंशि' पुष्पों की माला विजय-सूचक और 'वाहे' पुष्पों की माला पराजय-सूचक मानी गई है।—अनु०