कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२८२ कंब रामायण
घने केशोंवाली तथा मीनाक्षी युवतियों के उज्ज्वल पद-कमलों के स्पर्श से प्राणवान् हो उठी हो।
मुनि, निम्न जाति के लोगों के द्वारा चलाई जानेवाली नावों को न छूकर, सङ्कल्पमात्र से सिद्ध होनेवाले गगन-सञ्चार (गगन-मार्ग) से देवों के जैसे गये। स्वर्ग, भूमि और अन्य किसी भी लोक में सत्य-युक्त तपस्या से बढ़कर और क्या हो सकता है ?
साठ सहस्र अक्षौहिणी संख्यावाली वह सारी सेना तथा नगर की सारी प्रजा, वीचियों से पूर्ण गंगा नदी को पीछे छोड़कर आगे बढ़ चली।
जब सारी सेना भँवरों से भरी नदी को पार कर गई, तब कपट पूर्ण धन-लिप्सा से रहित होकर अपने त्याग के द्वारा पृथ्वी के पुराने बड़े राजाओं को भी नीचा दिखानेवाले भरत, नाव पर आरूढ़ हुए।
उनका अनुपम अनुज (शत्रुघ्न), तीनों माताएँ, उत्तम गुणवाला सुमन्त्र तथा पवित्र मित्र गुह—ये सब जब आसीन हो गये, तब वह नाव भी डाँड़-रूपी अपने पैरों को बढ़ाकर चल पड़ी।
तब गुह ने, बहुजनों तथा देवों के द्वारा भी आवृत होनेवाली अति गभीर कौशल्या देवी को देखकर भरत से पूछा—हे विजयमालाधारी ! ये कौन हैं ? भरत ने उत्तर दिया—जिन चक्रवर्ती के द्वार पर बड़े-बड़े राजा लोग भी खड़े रहते थे, उनकी ये पट्टमहिषी हैं। जिन्होंने त्रिभुवन के सृष्टिकर्त्ता ब्रह्मा को भी उत्पन्न करनेवाले को (अर्थात् विष्णु के अवतार को) अपनी अपूर्व संपत्ति के रूप में पाकर भी मेरे जन्म लेने के कारण खो दिया है।
भरत के यह कहते ही गुह उनके चरणों पर दंडवत् हो गिर पड़ा और रोने लगा। बछड़े से बिछुड़ी हुई गाय के समान दुःख से युक्त कौशल्या ने भरत से पूछा—यह कौन है ? वीर कंकणधारी कुमार (भरत) ने उत्तर दिया—यह पुरुष रामचन्द्र का प्रिय मित्र है। लक्ष्मण, उनके अनुज (शत्रुघ्न) तथा मैं, हम तीनों का बड़ा भाई है। पर्वत-समान कंधोंवाला इस पुरुष का नाम गुह है।
यह वचन सुनकर कौशल्या ने यह कहकर आशीर्वाद दिया—हे पुत्रो ! अब तुम लोग दुःखी मत होओ। पराक्रमी राम-लक्ष्मण का नगर छोड़कर वन जाना भी तो अच्छा ही हुआ। तुम पाँचों पर्वत-समान कंधों तथा सूँडवाले हाथी के जैसे वीर इस गुह के साथ मिलकर एकता से चिरकाल तक इस पृथ्वी की रक्षा करते रहो।
फिर साकार धर्म-जैसी सुमित्रा के बारे में गुह ने भरत से प्रश्न किया—'तात ! ये करुणामयी देवी कौन हैं ? भरत ने उत्तर दिया—सत्य को स्थिर रखकर, सन्मार्ग पर चलकर, अपने प्राण त्यागनेवाले चक्रवर्ती की ये छोटी पत्नी हैं। सबके लिए वंदनीय प्रभु (राम) का अनुज, जो सदा उनका अनुवर्ती रहता है, उस (लक्ष्मण) की जननी हैं।
फिर, उस कैकेयी को, जिसने अपने पति को श्मशान में, पुत्र (भरत) को दुःख-सागर में, करुणा-समुद्र राम को घोर कानन में भेजकर, घोर रूपधारिणी...