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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 296

२८६ कंब रामायण

रामचन्द्र के निकट जा पहुँचे और बोले—भरत आपका आदर किये बिना प्राचीरों से आवृत्त अयोध्या की सेना को लेकर आप पर आक्रमण करने को आ रहा है ।

यों कहकर लक्ष्मण ने ( कटि मे ) कटार और ( पैरों में ) वीर-वलय धारण किये । अनेक बाणो से भरा तूणीर लिया । युद्ध-कवच पहना । हाथ मे धनुष लिया । और प्रभु के चरणों को प्रणाम करके ये बचन कहे—

इह और पर-लोक दोनो के फलों को खो देनेवाले उस भरत के ऊँचे कंधो के वल को, उसकी सेना के महत्त्व को एवं अपने इस अनुज ( अर्थात्, लक्ष्मण ) के अनुपम पराक्रम को देखकर आप आनन्दित होगे ।

बड़ी पीडा से मरनेवाले हाथियों के ढेरों को लुढ़कानेवाले, रथो को बहानेवाले ( हाथी, अश्व आदि की ) आँतो को बिखेरकर ले चलनेवाले तथा अरण्य मे फैलनेवाले रक्त-प्रवाह को आप अभी देखेगे ।

मेरे बाण ( शत्रुओ के ) हथियार, हाथ, कवच से आवृत्त वक्ष तथा प्राण सबको छिन्न करके उनके शरीर के भीतर प्रविष्ट होगे । ( मेरे वाण ), उनके रक्त से भी सिक्त न होकर बड़े वेग से सब दिशाओ मे जाकर, दिग्गजो को भी भयभीत करेंगे । हे वीर ! आप देखेंगे ।

अति वेग से फाँदनेवाले अश्वो के मर जाने पर, रथो की स्वर्णमय पीठों पर, टूट-कर गिरे हुए ढालों को अपने हाथ में लेकर भूतो को संगीत के साथ नृत्य करते हुए देखेंगे ।

( लक्ष्मण ने राम से कहा—) अलंकारों से युक्त हाथियो से पूर्ण भरत की सेना को मैं एक क्षण मे निर्मूल कर दूँगा, जिससे वीर-स्वर्ग भी भार से अपनी पीठ झुकाने लगेगा तथा समुद्र-रूपी वस्त्र से युक्त पृथ्वी भार-मुक्त होकर विश्राम करेगी । हे उदारगुण ! यह आप देखेगे ।

उमड़कर चलनेवाले रक्त-प्रवाह मे तैरने के कारण लाल हुए सून और उनके साथ छोटी आँखवाले पिशाच तथा शिर-रहित कबध, देवों के जैसे ही यह कहते हुए कि 'सारी पृथ्वी आपके अधीन हो गई है', नाचेंगे ।

मुख-पट्टो से भूषित मत्तगजो, अश्वों, भारी भुजाओ से युक्त पैदल सेना के वीरो आदि के मरने पर उनके समुद्र-सदृश रक्त से सप्त समुद्रो को उथलकर गरजते हुए आप सुनेगे ।

आप देखेंगे कि मेरे शूरो से कैसे पैदल सेना छिन्न-भिन्न होती है । रथ विध्वस्त होते हैं । वीरो के करवाल टूट जाते हैं । दृढ धनुष टूट जात हैं । बडे गजो और अश्वो के पैर, शिर आदि टूट जाते हैं और उनपर आरूढ वीरों के पैर और हाथ कट जाते हैं ।

बडे पखवाले तथा स्वर्णिम काति को बिखेरनेवाले मेरे बाणो को, उन दोनो—( अर्थात्, भरत और शत्रुघ्न ) के वक्षो को छेदकर, उनका मास निकालकर, गगन-मार्ग मे उडते हुए और ( मासभक्षी ) पक्षियो को बुलाते हुए, आप देखेंगे ।

हे चक्रधारी ! एक स्त्री के मोह से समार-भर को दुःख देनेवाले चक्रवर्ती ( दशरथ ) की आज्ञा से जिस भरत ने राज्य पाया है, उसे अब मेरी आज्ञा से यह राज्य