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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

पृष्ठ 32, कुल 549 में से

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पृष्ठ 32

१८ = कंब रामायण

शिल्प-शास्त्र के अनुसार निर्मित वह स्वर्ण-पत्रों से आवृत गोपुर अपनी कांति को ऊपर के सप्त लोकों तक फेंकता है, उस गोपुर पर माणिक्य-मय कलश रखे हैं। वह गोपुर ऐसा लगता है, मानो भूमिदेवी को मुकुट पहनाया गया हो।

धवल प्रासाद, जिनपर सफेद कौडियों को पकाकर बनाये गये चूने की पुताई की गई है और जो इतने उज्ज्वल हैं कि उनके सम्मुख चन्द्रमा भी काला दीखता है, ऐसे लगते हैं, मानो भयंकर प्रभंजन के चलने से क्षीर सागर से उत्तुंग तरंगें ऊपर की ओर उठ आई हों।

(उन धवल सौधो के उपरिभाग में) बिंदियोंवाले सुन्दर कबूतरों के रहने के लिए दरवे (कबूतरों के आवास) बने हुए हैं, जिनमें सोने के पत्र लगाये गये हैं, धवल प्रासाद पर ये सुनहले ताक ऐसे लगते हैं, मानों हिमाचल के शिखर पर अकलंक सूर्य की प्रभातकालीन सुनहली किरणों के पुञ्ज पड़े हों।

(उस नगर में) इस प्रकार के असंख्य कोटि प्रासाद हैं, जिनमें हीरकमय सुन्दर खंभों के मस्तकों पर मरकत-मय छतों को सुचारु रूप से बिठाकर उन छतों पर सजीव दीखनेवाले चित्र अंकित किये गये हैं; वे प्रासाद ऐसे हैं कि स्वर्ग-लोक के निवासी भी उन्हें देखकर विस्मित हो जाते हैं।

(उस नगर में) ऐसे अनेक सौध हैं, जिनके चन्द्रकांतमय तल पर चन्दन के खंभे खड़े करके, उनके प्रवालमय मस्तकों पर रक्तवर्ण के माणिक्य-मय शहतीर रखे गये हैं और जिनकी दीवारें इन्द्रनील रत्नों से जड़ी हैं।

वे प्रासाद ऐसे हैं कि उनके खंभो के पाद कमल के आकार के हैं, वे नाग-लोक के सर्पों को छूनेवाले हैं, अतिमनोहर दर्शनीय अलंकारों से भरे हैं, विशाल अंतराल (खाली स्थान) से युक्त हैं, बाहर से सोने के उपकरणों से अलंकृत हैं अतः वे (प्रासाद) वार-नारियों की तुलना करते हैं।

(वारनारियाँ) जिनके पाद कमल के समान होते हैं. जो कामी पुरुषो (चेटो)¹ का आलिंगन करती हैं, सुन्दर अलंकारों से सुशोभित होती हैं, उनका अंतर प्रेम से शून्य होता है. पर बाहर स्वर्णाभरणो से भूषित रहती हैं।

उन मनोहर प्रासादों के भीतर जानेवाले व्यक्ति उनकी शोभा पर मुग्ध होकर निर्निमेष नयनों से उसे देखते रह जाते हैं और जब दीवारो की कांति उन व्यक्तियों पर पड़ती हैं, तब वे देवों के समान दीखते हैं; अतः अपनी ऊँचाई के कारण देवलोक में भी पहुँचे हुए वे प्रासाद उन दिव्य विमानों के जैसे ही हैं, जो संकल्पमात्र से सब दिशाओं में चले जाते हैं।

वे प्रासाद, जो मनोहर आभरण-भूषित रमणियाँ और मालाधारी पुरुषों के आवास हैं और धर्म-मार्ग से कभी विचलित न होनेवाले (गृहस्थों) के आवास हैं, रत्न और स्वर्ण के अतिरिक्त अन्य किसी वस्तु से नहीं बने हैं, वे अपनी कांति से सूर्य को भी परास्त करनेवाले हैं।

गगन तक उन्नत, अपार संपत्ति से युक्त, अति प्रसिद्ध तथा देदीप्यमान कांति से


¹ तमिल में 'चेटु' शब्द के दो अर्थ होते हैं—(१) शेषनाग, (२) चेट या वेश्याप्रेमी। प्रासाद और वारनारी, दोनों, चेटों को आलिंगित करते हैं।

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