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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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कंब रामायण

खरोंच-खरोचकर गड्ढे बना देते हैं; जिससे मनोहर राजकुमारों का क्रीडा-स्थल असमतल (ऊबड़-खाबड़) हो जाता है, फिर (खेलते हुए राजकुमारों के शरीरों से गिरनेवाले) सुगन्ध-चूर्णों से वे सब गड्ढे पट जाते हैं।

युवतियाँ गेंद खेलती हैं, तब उनके आभरणों से मोती गिरकर धरती पर बिखर जाते हैं; उन गिरे हुए मोतियों को असंख्य परिजन बुहार-बुहारकर एक ओर डालते रहते हैं, इस प्रकार एकत्र मोतियों की राशियाँ शीतल कांति बिखेरती हुई चन्द्र को भी मंद बना देती हैं।

नृत्यशालाओं में सुन्दरियाँ नृत्य करती हैं, उनके काले कटाक्ष-रूपी बरछे कामुक व्यक्तियों के हृदयों को खाते हैं (अर्थात् उनके हृदयो पर चोट करते हैं) फिर उन पुरुषों के प्राण, उन रमणियों की कटि के समान ही क्षीण होने लगते हैं और (उन रमणियों के प्रति) मोह बढ़ने लगता है।

कुछ उपवन सद्योविकसित पुष्पों से मधु प्रवाहित करते हैं; उस मधु का पान करने की इच्छा से दक्षिण पवन और भ्रमर मद-मंद गति से (उन उपवनों मे) प्रविष्ट होते हैं; उनके प्रविष्ट होते ही विरह से पीड़ित रमणियों के तपते हुए स्तन पीडा से कृश हो जाते हैं।

वक्र आकृतिवाली मकर-वीणा से उठनेवाले मधुर स्वर (रमणियों के) मनोहर संगीत के साथ ध्वनित होते रहते हैं, उस संगीत के अनुकूल ही चर्म से ढके (मृदंग आदि) वाद्य बज उठते हैं, (उस संगीत को सुनकर) रमणियों के साथ बोलते रहनेवाले शुक आँखें बद कर सोने लगते हैं।

गाँठदार धनुष से युक्त ललाट (अर्थात्, सुपुष्ट भौंहों से सुशोभित) और बिब-फल के समान लाल अधर, इन (दोनों) से शोभायमान सुन्दरियों के घने कमल-पुष्प-सदृश चरणों के आघात पाकर, जिनपर मृदुल महावर आदि से अलंकरण किया गया है, (पुरुषों की) बलिष्ठ भुजाएँ लाल हो उठती हैं।

उस नगर में, जहाँ (नारी-मणियो की मुख-कांति के कारण) समय का ज्ञान होना भी कठिन है, सब के द्वारा वदनीय (सद्गुणवती) युवतियों के दीप-समान उज्ज्वल शरीर की कांति को देखने की इच्छा से ही चित्रों में अंकित प्रतिमाएँ भी अपलक हो खडी रहती हैं।

शीतल कमल-पुष्प पर निवास करनेवाली (लक्ष्मी) देवी के विश्राम-स्थल के सदृश बने हुए (अयोध्या के) प्रासादों में अंधकार को हटाता हुआ व्यापक कांति-पुंज क्या पुष्ट शिखाओं से युक्त घृत-दीपों से निकलता है, या रत्न-दीपों से निकलता है, अथवा सुन्दरियों के शरीर से ही निकलता है?

नृत्य में कुशल युवतियाँ, मर्दल-ताल, संगीत आदि के अनुरूप, शास्त्र-सम्मत ढंग से, त्रिविध पदगतियाँ दिखाती हैं, उनकी पद-गतियों का विश्लेषण करके उन्हें समझानेवाले, उन रमणियों के मंजीर (पायल) ही नहीं, वहाँ के अश्वों के चरण भी हैं।¹


१. वहाँ के अश्व भी उनकी पदगति का अनुकरण करके नाचने लगते हैं।