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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 349

अरण्यकाण्ड ३३१

फिर, यह कहकर कि—अपनी नाक, कानो और स्तनो को खोकर भी (तुम लोगो के साथ) मैं कैसे रह सकती हूँ? तुम्हारे मन को समझने के लिए ही तो मैने यह माया की थी ? अब मै पवन से भी तेज अग्नि से भी क्रूर खर को बुला लाऊँगी, जो तुम लोगों के लिए यम बनेगा—अशमनीय बेर के साथ वहाँ से चली गई । ( १-१४३ )

अध्याय ६

खर-वध पटल

रक्त की धारा बहाती हुई, बिखरे केशोवाली, नाली-जैसे छेद से युक्त नाकवाली और विशाल मुँहवाली वह (शूर्पणखा), जाकर (जनस्थान में) स्थित भयंकर खर के चरणो पर ऐसे गिरी, जैसे कोई लालिमा से युक्त बादल हो।

'(राक्षसो के) विनाश का यह दिन है'—इस बात की सूचना देते हुए, यम की आज्ञा से बजनेवाले नगाड़े के समान, अकेली चिल्लाती हुई वह (शूर्पणखा), इस प्रकार धरती पर लुढ़कती रही, जिस प्रकार गरजते मेघ से गिरे हुए वज्र की अग्नि से जलता हुआ कोई नाग हो।

उस खर ने उसे देखा, जिसके मुँह से कठोर वचनों के अनुकूल धुआँ निकल पड़ता था और पूछा—'निर्भय होकर इस प्रकार तुम्हारा रूप विकृत करनेवाले कौन हैं?' तब नासिका-द्वार से बहनेवाले रक्त से रुँधी हुई आँखोंवाली उस (शूर्पणखा) ने कहा—

दो मनुष्य हैं, जो मुनिवेषधारी हैं, हाथो में दृढ धनुष एव करवाळ धारण करने-वाले हैं, मन्मथ के समान सुन्दर रूपवाले हैं, धर्मस्वभाववाले हैं, दशरथ के पुत्र हैं, राक्षसो के साथ युद्ध करने के विचार से उनको ढूँढते रहते हैं।

वे तुम्हारे बल की कुछ परवाह नही करनेवाले हैं। धर्म-मार्ग पर स्थिर रहकर उसकी रक्षा का विचार करनेवाले हैं, विजयशील भाले रखनेवाले राक्षसों का विनाश करने का दृढ़ निश्चय रखनेवाले हैं।

उनके साथ एक मुग्ध (स्त्री) है, जो इतनी महिलोचित सुन्दरता से पूर्ण है कि पृथ्वी में, दुर्लङ्घ्य स्वर्ग-लोक मे तथा अन्य (पाताल) लोक में, कही अन्वेषण करने पर भी उसकी समता करनेवाली स्त्री नही मिलेगी। मैने अपनी आँखों से उसे देखा है। लेकिन, उसका वर्णन मै नही कर सकती।

उसे देखकर मैंने सोचा—अन्यत्र दुर्लभ सुन्दरता से युक्त इस रमणी को मै लङ्काधीश के लिए ले जाऊँगी और उस पर झपटी। तब उन मनुष्यों ने क्रुद्ध होकर मेरी नाक काट डाली।—उसने यों कहा।

उस खर ने, जो अपने आकार से संसार को भय-विकम्पित करनेवाला था और