कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 353, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंअरण्यकाण्ड ३४३
उनके कंधे इतने दृढ तथा बलवान् थे कि इन्द्र आदि के द्वारा फेंके गये बड़े शस्त्र उनपर लगकर चूर-चूर होकर छितरा जाते थे। उनकी कठोर आज्ञा ऐसी थी कि यम भी उनके चरणों पर गिरकर उनकी अधीनता स्वीकार करता था। वे ऐसे थे, मानों भयंकर अग्नि ही साकार हो गई हो।
वे शूल, पाश, घने लाल केश, क्रूर नेत्र और खड्ग दंतों से युक्त थे। वे इतने काले थे कि उनके सन्मुख विष भी सफेद जान पड़ता था। अपनी शक्ति से काल भी उन्हे अपना काल समझकर डरता रहता था। वे ऐसे रूपवाले थे।
वे वीर-कंकणधारी थे। पुष्पमालाधारी थे। कवच से आवृत वक्षवाले थे। उज्ज्वल आभरण-भूषित थे। कुंचित भुकुटिवाले थे। अग्नि-सदृश (लाल) केशवाले थे। उनके मन युद्ध की कामना से उनके लिए उमंग से भर जाते थे। अपने में वे लोग बड़ी एकता रखते थे।
अतिदृढ दंत और मद-स्रावी हाथीवाला इन्द्र भी उनके सम्मुख आ जाय, तो वह भी भयभीत होकर, पीठ दिखाकर, भाग खड़ा होगा। तीनो नश्वर भुवनो में युद्ध करने का मौका न पाकर उनके पर्वत-जैसे कंधे खुजलाते रहते थे।
हाथी, घोड़े, भूत, वानर, बलवान् सिंह, क्रोधी भालू, श्वान, व्याघ्र, शरभ—ये अग्नि-सदृश चमकते तथा भयजनक मुखवाले तथा क्षीर-समुद्र में उत्पन्न हलाहल के समान नयनवाले थे।
कोई आठ हाथोवाले थे। कई सात हाथोवाले थे। कई नेत्रो से अग्नि उगलने-वाले सात-आठ मुखोवाले थे। बलिष्ठ टाँगोंवाले थे। प्राणियो को अपने दीर्घ करो से उठाकर मुँह में ठूँसकर चबा जानेवाले थे। विनाशहीन थे।
यक्षो से छीनकर लाये गये, असुरो से दिये गये, देवो को डराकर उनसे बलात् लिये गये, अश्रान्त गन्धवों को भगाकर उनसे छीनकर लाये गये, करुणाळु सिद्धो को सताकर उनसे लिये गये—
मयूर-पक्ष, ध्वजा, छत्र, चामर, हाथियो पर रखने योग्य बड़ी पताकाएँ, वितान तथा अन्य अनेक राजचिह्न, विना व्यवधान के, सर्वत्र शोभायमान थे और गगनतल मे व्याप्त होकर ससार-भर में सूर्य का-सा प्रकाश फैला रहे थे।
वे चौदह सेनापति चौदहो भुवनो को जीतनेवाले थे। वे सैनिक परशुधारी थे, करवाळधारी थे, उज्ज्वल त्रिशूलधारी थे और सिंह और व्याघ्र के समान हिंस्र क्रोधवाले थे।
वे धनुर्धारी थे। वडे खडगो से युक्त थे। ओठो पर रखे (ओठो को चबाते हुए) दाँतोवाले थे। मेरु पर्वत को भी उखाड़ने की शक्ति रखते थे। अश्व-जुते रथोवाले थे। अपने कहे अनुसार करने की धृति और इच्छा-शक्ति रखते थे। ऐसे सैनिक सब दिशाओ से आकर एकत्र हुए।
शत्रुओ के प्राणो को उनके शरीरो से पृथक् करनेवाले और विजयमाला से भूषित त्रिशूलो को धारण किये हुए, दृढता से युक्त दूषण, त्रिशिरा इत्यादि अनेक राक्षस-नायक कोलाहल से भरी, नगाड़े बजानेवाली सेनाओं को लेकर आ पहुँचे।