कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 363, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंअरण्यकाण्ड ३५३
अतिवेग से भागनेवाले कुछ राक्षस, बड़े हाथियो के पेट में पड़े छतो के द्वार-रूपी कदराओं में अपने खड्ग-सहित घुस जाते थे और पास खड़े कवध को देखकर यह कहकर सिर पर अपने हाथ जोड़ लेने थे कि—हे मेरे साथी, तुम यही कहना कि तुमने हमको नही देखा है।
इस प्रकार भागनेवाले राक्षसो को देखकर, अति वेगवान् अश्वो से जुते रथ पर आरूढ दूषण ने कहा—हमारे पराक्रम के योग्य युद्ध-कौशल से हीन इस मनुष्य को देखकर मत डरो। मै जानता हूँ कि डर का कोई कारण नही है। मै कुछ कहना चाहता हूँ, उसे सुनो।
जो लोग अपयश देनेवाले भय को मन मे रखकर जीते हैं, उनसे सुन्दर कंगन पहननेवाली स्त्रियाँ भी नही डरती हैं। धैर्य-रूपी कवच ही वास्तव में रक्षा कर सकता है। भय प्राणी की रक्षा कभी नही कर सकता।
पूर्वकाल मे, तीक्ष्ण भाले को धारण करनेवाले इन्द्र तथा अविनाशी त्रिदेवो के साथ हुए युद्ध मे कौन राक्षस डरकर भागा था ? कदाचित् तुम लोगो ने, तुमसे डरकर भागनेवाले देवो से अब यह (डरकर भागना) सीख लिया है, इसीलिए अब यो भ्रात हो रहे हो।
तुम इतने बड़े वीर हो। फिर भी एक मनुष्य से हारकर, अपने हाथ मे शस्त्र रखे, नगर मे जाकर छिपने के लिए भाग रहे हो। तुम अपनी मदमाते नयनोवाली पत्नियो के वक्ष से वक्ष मिलाकर आलिंगन का सुख भोगने जा रहे हो ?
हे वीरो। (क्रोध से) ताम्रवर्ण रहनेवाली तुम्हारी आँखें अब दूध के समान श्वेत पड़ गई हैं। अहो! क्या तुम लोग अपनी स्त्रियो को, घने वन मे भागते समय वृक्ष की शाखाओ के टकराने से अपनी पीठ पर लगे छतों को दिखाओगे, या अपने वक्ष पर लगे शरो के छत को दिखानेवाले हो।
'इस हमारे शत्रु, मनुष्य का युद्ध-पराक्रम उन देवो के लिए भी दुष्प्राप्य हैं'—(शत्रु की) ऐसी प्रशंसा का कारण बनकर, इस प्रकार पीठ दिखाकर तुम्हारा भागना—अजेय भुजबल से युक्त, तुम्हारे कुल के नायक (रावण) की बहन (शूर्पणखा) की नाक कटने की बात छोड़ भी दो, तो भी यह हमारे अपयश का कारण बन रहा है। अब इससे बढ़कर दयनीय दशा और क्या हो सकती है ?
अद्भुत शस्त्र-प्रयोग मे निपुण, धीरता-पूर्ण युद्ध-कार्य से जीविका-निर्वाह करने-वाले, शत्रुओ से छीनकर लिये गये करवालों को धारण करनेवाले, हे राक्षसो। अब क्या तुम लोग मोती आदि को बेचकर वणिक्-वृत्ति करनेवाले हो ? या तीक्ष्ण बरछे, करवाल आदि से पृथ्वी को जीतकर कृषक-वृत्ति करनेवाले हो ? बताओ तो सही।
यो कहकर उसने आगे कहा—तुम लोग कुछ समय तक खड़े रहकर मेरे दीर्घ धनुष का प्रभाव देखो। फिर, वह (दूषण) स्वय अपनी तरंगायमान समुद्र-सदृश सेना को लेकर (राम के) सम्मुख जाकर आक्रमण करने लगा। वह दृश्य देखकर देवता लोग भी मूर्च्छित हो गये। तब राम ने भी उससे यह कहकर कि—'अपने को भली भाँति बचाओ'—आगे पग बढ़ा दिया।