कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 385, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंअरण्यकाण्ड ३७७
रावण की आज्ञा पाकर वे सेवक, 'हुं' ध्वनि करने के समय के भीतर ही (अर्थात्, अतिशीघ्र ही) अनेक स्थानो मे दौडे और मन्त्रियो को समाचार दिया। समाचार पाते ही वे मंत्री लोग, पताकाओ से युक्त रथों पर, घोड़ों पर, शिविकाओ में तथा त्रिविध मद से युक्त गजो पर आरूढ होकर इस प्रकार आ पहुँचे कि उन्हे देखकर भूसुरो और देवताओ के मन भी व्याकुल हो उठे।
मन मे उठे विचार को शीघ्र कार्यान्वित करनेवाले, किन्तु अब अपने कर्त्तव्य को निश्चित नही कर पानेवाले रावण ने अपने मंत्रियों के साथ ठीक मंत्रणा की, फिर गगन-गामी विमान पर चढकर अकेले ही उस मारीच के आश्रम मे आ पहुँचा, जो पन्चेन्द्रियो का दमन करके तपस्या मे निरत था।
रावण के आते ही मारीच ने, सभय तथा व्याकुल होकर काले तथा बड़े आकारवाले रावण का आगे जाकर सब प्रकार से स्वागत-सत्कार किया और उसके मुख की ओर देखकर कहने लगा---
मन में यह सोचकर चिंतित होता हुआ कि न जाने यह (रावण) किस प्रयोजन से यहाँ आया है, मारीच कहने लगा—सुन्दर तथा शीतल कल्पवृक्षो की छाया मे रहकर शासन करनेवाले देवेंद्र और यमराज को भी भयभीत करते हुए राज्य करनेवाले, हे शासक ! अब इस अरण्य मे, मेरे इस कष्टदायक कुटीर में, दीन जन के जैसे किस प्रयोजन से आये हो ? कहो।
रावण कहने लगा—अपनी शक्ति-भर प्रयत्न करके मै अपने प्राणों को रोके हुआ हूँ। अब शिथिल हो रहा हूँ। मेरे महत्त्व, कीर्त्ति, प्रभाव—सब मिट गये हैं। इसका क्या कारण है, मै उसके बारे मे तुमसे किस प्रकार शांति के साथ कह सकता हूँ ? इस घटना से हमे ऐसा अपयश प्राप्त हुआ है कि देवताओ से हमे लजित होना पड़ा है।
हे शूलधारी ! मनुष्य पराक्रम दिखाने लगे हैं? उनके खड्ग से तुम्हारी भतीजी की नाक और कान कट गये है। विचार करने पर मेरे और तुम्हारे वशो के लिए इससे बढकर और क्या अपमान हो सकता है? तुम्ही कहो।
एक मनुष्य ने दृढ धनुष को लेकर, बड़े क्रोध के साथ अधिक सख्या मे आकर युद्ध करनेवाले मेरे भाइयो की आयु को समाप्त कर दिया। यह तो अबतक की हमारी सब विजयों के लिए कलक है न। दृढ शूलधारी तुम्हारे भतीजे इस प्रकार मर मिटे। वह मनुष्य तो अपनी दोनो भुजाओ को ही लेकर अबतक सुखी रहता है न ?
मेरे मन की अग्नि शान्त नहीं हुई है। मरण की वेदना भोग रहा हूँ। वे मेरे समान नहीं हैं। अत. मै उनसे युद्ध करना नही चाहता हूँ। मै यहाँ इसलिए आया हूँ कि तुम्हारी सहायता लेकर उन (मनुष्यो) के साथ रहनेवाली; प्रवाल को भी परास्त करनेवाले लाल अधर से युक्त, लता-समान सुन्दरी को उठा ले आऊँ और अपने अपमान का बदला लूँ—यो रावण ने कहा।
भड़कती हुई ज्वाला में जैसे लोह को पिघलाकर डाला गया हो, उसी प्रकार रावण के वचन मारीच को तप्त करने लगे। उसका कथन पूरा होने के पूर्व मारीच ने