कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 404, कुल 549 में से
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कम्ब रामायण
वृक्ष अपनी सब शाखाओं के साथ धरती पर लंबे हो गिर गये। गगन के मेघ, अन्तरिक्ष में बहुत ऊपर कही उड़ गये। सर्प, यह सोचकर कि उग्र रूप गरुड ही नभोमार्ग से आ रहा है, अपने फन समेटकर छिप गये।
जटायु के दोनों पंखों की हवा के वेग के कारण, हाथी, शरभ आदि मृग, वृक्ष, कूज, शिलाएँ तथा सब अरण्य उड़कर अन्तरिक्ष में भर गये। जिससे अंतरिक्ष और अरण्य दोनो स्थानान्तरित-से हो गये।
जटायु अपने विशाल तथा बलवान् पंखों को फैलाये, यह कहता हुआ आया कि पुरुषोत्तम (राम) की देवी को भूखंड-सहित ऊँचे रथ पर रखे, तू कहाँ ले जा रहा है? मैं गगन को और सब दिशाओं को (अपने पंखों से) आवृत कर दूँगा (जिससे तेरे जाने का मार्ग नहीं रहे)।
गुणहीन उस (रावण) के यन्त्रमय रथ की गति को रोकने के विचार से, सिंदूर जैसे लाल पैर और सिर एवं सध्याकाश-जैसे कंठ के साथ, कैलास पर्वत के जैसे आकार-वाला गृद्धराज (जटायु) आ पहुँचा।
उस समय वहाँ आकर उस (जटायु) ने उस स्त्री-रत्न को देखकर कहा—डरो नहीं। फिर यह जानकर कि (रावण ने सीता का) स्पर्श नहीं किया है, अपने उमड़ते क्रोध को किंचित् शान्त करके रावण से कहने लगा—
तू मिट गया। तू ने अपने बन्धुवर्ग-सहित, अपने जीवन को जला दिया। अरे तू यह क्या करने लगा है? यह जान ले कि तू मर गया। इस देवी को छोड़कर चला जा। यदि ऐसा करेगा, तभी जीवित रह सकेगा।
हे मूढ़! तूने अपराध किया है। विश्व की माता-समान देवी को तूने अपने मन में क्या समझा है? हे विवेकहीन! अब तेरा सहारा कौन है? (अर्थात्, विश्व की माता के प्रति अपराध करने पर तेरी रक्षा करनेवाला कोई नहीं रहा।)
हे राजन्! क्या तू नहीं जानता कि राम ने तेरे कुलवालों के साथ घोर युद्ध करके उनके प्राणों को यमराज का सुन्दर भोजन बनाया था और यम ने हाथो में भर-भर-कर नवीन भोजन पाकर आनन्द उठाया था?
तुम को मारने के लिए दौड़कर आनेवाले क्रोधी तथा घोर मत्तगज पर तू मिट्टी का ढेला फेंकना चाहता है। घोर विष को खाकर, भले ही तू यह न जाने कि वह (विष) प्राणहारी है, फिर भी क्या अपने प्राणों को स्थिर रख सकेगा?
तीनो लोको के निवासी, देवेंद्र, त्रिमूर्त्ति, यम आदि सब राम के आगे ऐसे रहते हैं जैसे व्याघ्र के सम्मुख हरिण हो। अति उत्तम धनुर्धारी राम को जीतने की शक्ति किसमें हैं?
इस संसार में अपने कुल के साथ विनाश पाने का इससे बढ़कर अन्य कुछ उपाय नहीं है। इतना ही नहीं। दूसरे जन्म में भी (यह कार्य) घोर नरक देनेवाला है। तूने इस कार्य को अपने किस जन्म के लिए सुखप्रद समझा है?
ये मानव (राम और लक्ष्मण) त्रिदेवों में प्रधान तथा (सारी सृष्टि के) आदि