कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 461, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिष्किन्धाकाण्ड ४५३
अपने मुख-गह्वर को खोलकर रक्त उगलने लगा। तब वाली ने उसपर ऐसा घूँसा मारा, जैसे पर्वत पर बिजली गिरी हो। उसके शब्द से ऊपर के सब लोक काँप उठे और सब दिशाएँ बहरी हो गईं।
वाली ने उसे अपने हाथो में यों उठा लिया जैसे चामर हो, और उसे घुमाने लगा। उसमे (दुन्दुभी का) रक्त चारो ओर छितरा गया, जिससे सब दिग्गज, जो दीर्घ दंतो तथा मद से युक्त थे, लाल हो गये।
वाली ने अपने वज्रमय करो से उस असुर को उठाकर इस प्रकार ऊपर फेंका कि मेघ-मंडल, सूर्य-मंडल तथा देवलोक को पार कर वह (दुन्दुभि का शरीर) ऊपर उठ गया। फिर, उसके प्राण ऊपर चले गये और शरीर धरती पर आ गिरा।
दुर्गंध-भरित उसका शरीर गगन की ऊपरी सीमा से टकराकर फिर नीचे आ गिरा। तब करुनालु मतंग मुनि ने जो शाप दिया, वह अब मेरे लिए सहायक बना है।—इस प्रकार (सुग्रीव ने) पूरा वृत्तांत कह सुनाया।
अमल प्रभु (राम) ने सारी कथा सुनी और अपने युद्ध-कुशल भाई (लक्ष्मण) से कहा—हे वीर! इस शव को तुम दूर फेंक दो। लक्ष्मण ने अपने पैर के अगूँठे से उसे उठाकर फेका। तब वह अस्थिपंजर पुनः एक वार सत्यलोक तक जाकर नीचे आ गिरा।
उस समय कपि-समूह मुँह खोलकर वज्र के समान गरज उठा। जब श्रीराम उद्यान में लौटकर आये, तब सुग्रीव ने राम से कहा—हे प्रभु! मेरा आपसे एक निवेदन है। (१-१५)
अध्याय ६
आभरण-दर्शन पटल
पहले एक दिन, हम (वानर) इस स्थान पर बैठे थे, तब पापी रावण एक स्त्री को (अपहरण करके) लिये जा रहा था, न जाने वह आपकी पत्नी ही थी या अन्य कोई स्त्री। वह स्त्री दूर आसमान पर से इस वन की ओर देखकर विलाप कर उठी थी।
कदाचित् यह विचार करके कि उसके आभरण दूत का काम देंगे, ताटंको तक फैले हुए नयनोवाली उस नारी ने अपने आभरणो को एक वस्त्र मे बाँधकर वर्षा के समान नयन-जल के साथ धरती पर गिरा दिया। हमने उस (आभरणो की गठरी) को अपने हाथो से पकड़ लिया।
हे वदान्य! हमने उन्हें सुरक्षित रखा है। हम आपके पास उन्हे ला देंगे। आप देखकर समझें (कि वे सीता के ही हैं या नही)।—ये वचन कहकर घृत-मिश्रित दूध-जैसे सद्भाववाले उस (सुग्रीव) ने आभरणो को अपने हाथ से लाकर दिखाया।
देवी सीता के आभरणो को (रामचन्द्र ने) भली भाँति देखा। उस समय