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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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बालकाण्ड ३५

जब उन गर्भवती देवियों के प्रसव का उपयुक्त समय आया, तब विशाल भू-देवी आनंदित हुई ; पुनर्वसु नक्षत्र और देवों से प्रशंसित कर्कटक लग्न, दोनों आनन्द से उछलने लगे।

सिद्ध, यक्ष, यक्षों की देवियाँ, तत्त्वज्ञानी ऋषिगण, देवगण, नित्यसूरिगण¹ पंक्ति-पंक्ति में (खड़े) आनंदित हो जयघोष कर उठे; धर्म-देवता का मनस्ताप मिट गया और वह आनन्द से भर गया।

सद्गुणों से भरी कौसल्या देवी ने, काजल और नव मेघों की छटा दिखानेवाली उस तेजोमय विष्णु को जन्म दिया, जो समस्त सृष्टि को अपने उदर में लीन कर लेता है और जो महान् वेदों के लिए भी ज्ञानातीत है ; ( उनके जन्म से ) ससार की विभूति बढ गई।

देवता लोग दसों दिशाओं में और आकाश में स्थित हो आनन्द-घोष कर रहे थे . इन्द्र आदि प्रणाम करके जय-जयकार कर रहे थे, ऐसे 'पुष्य नक्षत्र' और 'मीन लग्न' से युक्त शुभ घड़ी में निष्कलंक केकय-राजपुत्री ने एक पुत्र को जन्म दिया।

कल्पवृक्ष के अधिपति, पर्वतों के पंखों को काटनेवाले इन्द्र तथा उनके साथी अंतरिक्ष में आनन्द-नाद कर रहे थे। बाँबी में रहनेवाले सर्प ( आश्लेषा नक्षत्र² ) के साथ 'कर्कटक' ( लग्न ) ने भी नया जीवन पाया : पट्टमहिषियों में सबसे छोटी, कोमल लता-तुल्य सुमित्रा ने लक्ष्मण को जन्म दिया।

आदिशेष के सहस्र फणों से वहन की गई भूमि आनन्द से नाच उठी · वेद नाट्य करने लगे; सिंहराशि और मघा नक्षत्र ने ऊँचा जीवन पाया , ( इसी समय ) विष के समान काले नयनोंवाली सुमित्रा ने एक दूसरे पुत्र को जन्म दिया।

'राक्षस मिट गये'—इस खयाल से आनन्दित हो अप्सराएँ नाच उठीं, किन्नर अपने अमृत-मधुर स्वर में गा उठे, विविध वाद्य बजने लगे; देवगण (आनन्द से) इधर-उधर दौड़ने लगे।

रानियों की सखियाँ दौड़कर दशरथ के पास गई, पुत्र-जन्म का समाचार सुनाकर आनन्द-नृत्य किया ; ( ज्योतिष में निपुण ) ब्राह्मणों ने एकत्र होकर नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति का अवलोकन करके कहा कि अब यह संसार दुःखों से मुक्त हो जायगा।

मुखपट्ट³ से सुशोभित गज के समान गंभीर और नीतियुक्त श्रीरामचन्द्र के शुभावतार के समय मेष (चैत्र) मास था • तिथि नवमी थी, नक्षत्र पुनर्वसु था . श्रेष्ठ लग्न


१. वैष्णवों के अनुसार श्रीवैकुंठ में विष्णु की चरण-सेवा करनेवाले गरुड, अनन्त, विष्वक्सेन आदि भक्त 'नित्यसूरि' कहे जाते हैं। भगवान् की आज्ञा से ये लोक-कल्याण के लिए कभी-कभी पृथ्वी पर अवतार भी लेते हैं।
२. लक्ष्मण का जन्म कर्कट राशि और आश्लेषा नक्षत्र में हुआ था। आश्लेषा नक्षत्र सर्पाकार होता है। साँप और केकड़े की मित्रता बतलाकर कवि ने चमत्कार दिखाया है।
३ मुखपट्ट : हाथियों के मुख पर लगाया हुआ सोने या चाँदी का रत्न-जटित कवच।