कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 501, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिष्किन्धाकाण्ड ४६३
पुरुषो के समान तथा विरह से पीडित तरुणियो के समान ही धीरे-धीरे अपने पूर्व रंग का त्याग कर अनिन्दनीय सुनहले रंग को प्राप्त करने लगे।
गगर नामक प्राणी, अनेक दिनों तक जल में रहने से शीत की पीडा से व्याकुल होकर जलाशयो से बाहर धूप में ऐसे पडे हुए थे कि सूर्य की कांति उनके शरीर पर बिखर रही थी। इस प्रकार, जलाशयो के तटो पर अनेक स्थानो में अपने मुख को बन्द किये वे सोये पड़े थे।
'वजी' नामक लताएँ, जिनमें (बैठकर) तोते मधुर स्वर मे बोल रहे थे, जिनमें मनोहर पंखोवाले भ्रमर केशों का दृश्य उपस्थित करते हुए उड़ रहे थे, जिनमें अतिसुन्दर पल्लव थे (जो कान की समता करते थे) और जो कटि के समान ही लचक-लचक जाती थी, तरुणियो के समान शोभायमान थी।
घोंघे, जिनकी पीठ झुकी हुई थी, अपने नेत्रो को सिकोड़कर कीचड़ में धँस गये, मानो उनके द्वारा उत्पन्न किये गये मोती के (रमणियों के दाँतो से) पराजित हो जाने से वे हरिण-सदृश रमणियों के सम्मुख प्रकट होना नही चाहते हो।
वर्षा के कारण पुष्ट हुए समतल प्रदेशों के कमल-पुष्पों के विशाल पत्तो की छाया में विश्राम करनेवाले दोषहीन केंकडे अब अपनी स्त्रियों के साथ अपने बिलो में उनके द्वारो को बन्द करके ऐसे पड़े थे, जैसे लोभी व्यक्ति हों। (१-१२१)
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अध्याय १०
किष्किन्धा पटल
इस प्रकार शरत् काल जब व्यतीत होने लगा, तब वीर अग्रज राम ने अपने अनुज को देखकर कहा—हे वीर ! निश्चित अवधि व्यतीत हो गई। किन्तु, निद्रा मे पड़ा हुआ वह राजा (सुग्रीव) अभी तक नही आया। उसका यह कैसा कार्य है ?
वह (सुग्रीव) दुर्लभ राज्य-सपत्ति को पाकर हमारे उपकारो को भूल गया है। अतः, उत्तम सदाचार मे वह भ्रष्ट हो गया है, धर्म को भुला दिया है, इसके प्रति किये हमारे स्नेह की बात छोड़ दो, वह हमारे पराक्रम को भी भूल गया है। इस प्रकार वह सुखी जीवन मे मत्त हो गया है।
जो कृतघ्न होकर अपूर्व रूप में प्राप्त स्नेह को भी भुला दे, उचित सत्य को मिटा दे एव अपने प्रण को पूर्ण न करे, उसको मारना दोष नहीं है। अतः, तुम जाओ और उसकी मनोदशा को जानकर लौट आओ।
तुम जाकर यह मेरा संदेश उस (सुग्रीव) को दो कि घोर पापियों को युद्ध में निर्मल करके स्वर्ग भेजने तथा (लोक मे) धर्म को सुरक्षित बनाने के लिए मैने जो धनुष