कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 510, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें५०२ कंब रामायण
किया। घने स्वर्णहारों तथा पुष्पहारों से विभूषित हे वीर ! हमने कोई अपराध नहीं किया। ऐसी अवस्था में उनका हमपर क्रोध करने का क्या कारण है ?
(तब सुग्रीव से अंगद ने कहा—) हे पिता। निश्चित तिथि को आप (श्रीरामचन्द्र के समीप) गये नहीं। अपार संपत्ति प्राप्त करके गर्व में फूल गये। उपकार को भूल गये। इन कारणों से (लक्ष्मण का) क्रोध भड़क उठा है। नीतिशास्त्र के पंडित हनुमान् ने उनका क्रोध शांत करने के लिए उनसे प्रार्थना की, तब (लक्ष्मण ने) हमें जीवित रहने दिया।
वानर-वीरों ने (लक्ष्मण के) आगमन का वेग (उग्रता) देखकर किष्किन्धानगर के गगनचुंबी दरवाजे को बंद कर दिया और आसपास के एक भी पर्वत को छोड़े बिना, सब पर्वतों को लाकर (दरवाजे पर) रख दिया। एवं उमड़ते क्रोध के साथ उन (लक्ष्मण) से युद्ध करने के लिए सन्नद्ध हो खड़े रहे।
पौरुषवान् (लक्ष्मण) ने (वानरों का) वह कार्य देखकर अपने सुन्दर कमल- सदृश चरण से (फाटक को) छुआ—(अर्थात्, पदाघात किया)। उसके छूने के पहले ही, दक्षिण से उत्तर तक फैली हुई, शिला-निर्मित प्राचीर, सुदृढ़ नगर-द्वार तथा फाटक पर चुने गये पर्वत, सब टूटकर बिखर गये और चूर-चूर हो गये।
यह देखकर बलवान् वानर-सेना किस दशा को प्राप्त हुई—मैं क्या कहूँ? कहाँ भागकर छिपी—मैं क्या कहूँ? (वानरों की) वह दशा देखकर माता (तारा) आभरण- भूषित रमणियों के साथ, बिजली-सदृश तथा पत्राकार बरछा धारण किये हुए (लक्ष्मण) के सम्मुख जाकर (उनके) मार्ग में खड़ी हो गई।
कुमार (लक्ष्मण) ने स्त्रियों की ओर आँख उठाकर भी नहीं देखा, मन-ही-मन उमड़नेवाले क्रोध के साथ खड़े रहे। तब नारी-रत्न (तारा) ने मधुर वचन कहकर प्रश्न किया--हे उत्तम ! हमारे यहाँ आपका यों आगमन कैसे हुआ? तब उन कुमार ने अपने आगमन का कारण कह सुनाया।
माता (तारा ने) उनके आगमन का प्रयोजन ठीक-ठीक समझ लिया। उनके क्रोध को शांत करते हुए ये वचन कहे—(सुग्रीव) आपकी आज्ञा को नहीं भूला है। भयंकर सेना को शीघ्र लाने के लिए दूतों को पर्वतों तथा पत्थरों से भरी विविध दिशाओं में प्रेषित कर दिया है और उनके लौटने की प्रतीक्षा कर रहा है। यही अब घटित वृत्तांत है।—यों (अंगद ने) कहा।
(अंगद के यों) कहते ही, सूर्यपुत्र कह उठा—यदि वे (राम-लक्ष्मण) क्रोध- करके उठ आयेंगे, तो इस धरती में तथा स्वर्ग में कौन उनके सम्मुख खड़ा रह सकेगा? धनुर्वीर वह कुमार (लक्ष्मण) जब इस प्रकार क्रोध के साथ, शीघ्र गति से आया, तो मुझे समाचार दिये बिना तुम लोगों ने क्या किया?
तब अंगद ने उत्तर दिया—विविध पुष्प-मालाओं से भूषित बलिष्ठ तथा उन्नत भुजावाले हे मेरे पिता ! मैंने पहले ही आपसे निवेदन किया था। किंतु, तब आप मत्त होकर पड़े थे। अतः, आपने ध्यान नहीं दिया। फिर, अन्य कोई उपाय न देखकर मैंने