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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 517

किष्किन्धाकाण्ड ५०६

अभिमान करने पर एक-एक वानर अकेले ही सारी धरती को मिटा देने की शक्ति रखनेवाले प्रमन्न चित्तवाले चार सहस्र वानर-वीरों की सेना को संचालित करते हुए, गवाक्ष आ पहुँचा।

अति बलवान् धूम्र नामक ऋक्षपति, दो सहस्र कोटि भालुओं की विशाल सेना को साथ लिये आ पहुँचा। ये ऋक्ष उज्ज्वल दंतवाले उस आदि वराह के सदृश बलवान् थे, जिसने अपने दाँत पर धरती को उठा लिया था और ऋक्ष, जो इतने भयंकर रूपवाले थे, मानो ऊँच तथा विशाल, पर्वतो को अपने एक रोम-कूप में समा सकते थे।

चलते-फिरते किसी पर्वत के सदृश रूपवाला, क्रोध के कारण स्मरण करने मात्रसे विष एव वज्र-जैसे ही कँपा देनेवाला, पनस नामक वीर, बारह सहस्र कोटि, कठोर क्रोधवाले वानरो की सेना को लेकर आ पहुँचा।

नील नामक वीर, वज्रघोष तथा समुद्रघोष को भी परास्त करनेवाली अपार कोलाहल ध्वनि से युक्त, अतिविशाल, बलवान् तथा कठोर यम की समानता करनेवाले पचास करोड वानरों की सेना लेकर आया।

दरीमुख नामक वानर-वीर, भारी भुजावाले, दृढ़ वक्षवाले, वलशाली, स्थिर (स्वभाववाले), उग्र, कठोर नेत्रो से अग्नि उगलनेवाले, तथा पर्वत से भी अधिक विशाल आकारवाले तीम करोड़ वानरो की सेना-रूपी समुद्र को लेकर आ पहुँचा।

प्रख्यात गज नामक वानर वीर, तीस हजार कोटि की संख्या से, संसार-भर में फैले हुए कठोर क्रोध से सिंह-समूह को भी कँपा देनेवाले (सेना-रूपी) समुद्र के साथ आया, जिसकी सेना को देखकर ऐसा विचार होता था कि इसके लिए यह धरती भी पर्याप्त नहीं है। और दूसरी एक विशाल धरती की आवश्यकता है।

विशाल पर्वत के सदृश कधोंवाला जाम्बवान् समुद्र की वीचियो-जैसे लपककर चलनेवाली एक सहस्र साठ सौ करोड़ सख्यावाली, समस्त प्रदेश पर छाई हुई चलनेवाली बड़ी वानर-सेना को साथ लेकर आ पहुँचा।

असमान वल से युक्त दुर्मुख नामक वानर-वीर, कमल में उत्पन्न ब्रह्मा के यह आदेश देने से कि तुम जाकर राक्षसों को मिटा दो, दस लाख के दलो में विभाजित दो करोड़ वानर-सेना को साथ लेकर आया।

पुष्प-मालाओं से अलंकृत, पर्वत-समान विशालकाय द्विविध नामक वीर, कठोर क्रोधवाले अनेक लाखो वानरो को लेकर ऊपर के गगन और पृथ्वी को धूल से आवृत करता हुआ आ पहुँचा।

साकार विजय-जैसे रूपवाला, प्रभूत पराक्रमवाला मैन्द नामक वानर, मल्लयुद्ध में श्रेष्ठ गजगोमुख नामक वीर के साथ तथा अति क्रोधवाली शतलक्षसंख्य वानर-सेना के साथ आ पहुँचा।

कुमुद नामक वीर, चरखी-जैसे (वेग से) चलनेवाली, पवन से भी अधिक वेगवाली तथा यम से भी अधिक कठोर, इस प्रकार चलनेवाली, जैसे उज्ज्वल वीचियोवाला समुद्र अपने स्थान से उमड़कर जा रहा हो—ऐसे नौ करोड़ बलवान् वानरो की सेना को लेकर आ पहुँचा।