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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 520
५१२कंब रामायण

कोई उपाय है ? लोग कहते हैं कि उन्होंने इस भूलोक में समुद्र की सीमा को देखा है । किन्तु, इस सेना-समुद्र की सीमा को भली भाँति देखनेवाले कौन हैं ?

हे सुगंधित पुष्पमाला को धारण करनेवाले । ईश्वर के स्वरूप को, दस दिशाओं को, पञ्च महाभूतो को, सूक्ष्म ज्ञान को, उच्चारित शब्दो को, विभिन्न धर्मों के परस्पर के विभेद को तथा यहाँ एकत्र इस दोषहीन वानर-सेना को, संपूर्ण रूप से कौन देख सकता है ?

यदि हम इस विशाल सेना को यहाँ रहकर संपूर्ण रूप से देख लेंगे और फिर कार्य करने लगेंगे, तो उसीमें अनेक दिन व्यतीत हो जायेंगे । अतः, ठीक-ठीक विचार करके कर्त्तव्य कर्म पर मन लगाना ही उचित होगा—रामचन्द्र के यो कहने पर लक्ष्मण ने हाथ जोड़कर कहा—

हे देव ! यहाँ एकत्र इन वानर-वीरो के लिए जिस लोक में जो कार्य करना है, वह अत्यन्त सुलभ है। इनके लिए अमुक कार्य कठिन है—यह कैसे कह सकते हैं ? देवी का अन्वेषण करना ( इनके लिए ) अत्यन्त सुलभ है । इस सेना से पाप परास्त हो गया और धर्म जीत गया ।

तरंगों से भरे जल मे उत्पन्न कमल से उद्भूत ब्रह्मदेव ने इस विशाल लोक में जिन महान् प्राणियों की सृष्टि की है, वह इसलिए ही कि वे सजीव पर्वत जैसे इन वानरो की सेना को गिनने के लिए संख्यासूचक चिह्न बन सकें ।

हे महान् शास्त्रों में निपुण । आठों दिशाओं में अन्वेषणार्थ जानेवाले इन वानरो को सत्वर न भेजकर यहाँ रोक रखना ठीक नही—यों लक्ष्मण ने कहा। तब महिमामय (प्रभु) ने अलंकृत रथवाले सूर्य-पुत्र से कहा। (१-४०)


अध्याय १२

अन्वेषणार्थ प्रेषण पटल

( श्रीरामचन्द्र ने सुग्रीव को देखकर कहा—) यह सेना श्रेणियों में विभाजित है। ( इसके सैनिक ) अहङ्कार और परस्पर के वैरभाव से रहित हैं। अतः, विशाल रूप में एकत्र यह सेना किसी से भी अभेद्य है, क्या इसका परिमाण भी कुछ है ?

( सुग्रीव ने उत्तर दिया—) बुद्धिमानो के द्वारा विचार कर निश्चय किया हुआ एक संख्यावाचक शब्द है—'वेल्लम' ( १८,३५,००८ करोड़ का एक वेल्लम होती है)। वैसे सत्तर वेल्लम के परिमाण मे यह सेना है। इसको छोड़कर, यह कहना असंभव है कि इस सेना के परिमाण को सूचित करनेवाला अन्य कोई शब्द है।

इस सेना के वीरो मे मङ्गमठ करोड़ विजयी सेनापति हैं। इन सेनापतियो में सब से प्रमुख महासेनापति, कठोर यम को भी भस्म करने की शक्ति रखनेवाला नील (नामक) वानर है। यों (सुग्रीव ने) कहा।