कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 523, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंकिष्किन्धाकाण्ड ५१५
शक्ति है कि उसको नमस्कार करनेवालों को वह सब अभीष्ट प्रदान करता है। उसको प्रणाम करके आगे बढ़ना।
भयंकर तथा जलते हुए रेगिस्तानो, नदियों, विशाल जल-स्रोतों, ऊँचे पर्वतों; जो अगरु, चंदन आदि वृक्षों एवं मेघों से आवृत रहते हैं, तथा समृद्धियुक्त देशों को पीछे छोड़कर आगे के मार्ग पर बढ़ जाना। फिर, मरकत पर्वत के पास जाना, जहाँ गरुड़ ने विषमुख नागों को अमृत देकर अपनी माता विनता को (दासता से) मुक्त किया था। उस (पर्वत) को नमस्कार करके उसके पार्श्वमार्ग से आगे जाना।
फिर, उस ऊँचे वेंकटाचल पर जाना, जो उत्तरी भाषा तथा दक्षिणी भाषा (तमिल) की सीमा-रेखा बना है, जिसपर स्वयं भगवान् विराजमान रहते हैं; जो वेदों तथा शास्त्रों में प्रतिपादित सब पदार्थों की सीमा है, जो स्वयं सब धर्मों की पराकाष्ठा हैं, जिनका उपमान बनने योग्य कोई वस्तु नहीं है, जो ऐसा शोभायमान है, जैसा साकार यश हो और जिसके सानुओं में मधु के छत्ते भरे रहते हैं।
उस वेंकटाचल पर ऐसे महात्मा लोग रहते हैं, जो दोनों प्रकार के (पाप और पुण्य) फलो से संबद्ध कोई कर्म नहीं करते, जो देवताओ से प्रशंसित संपन्न जीवन तथा दूसरों पर निर्भर रहनेवाला दरिद्र जीवन—दोनों को समान मानते हैं तथा जो ऐसे उन्नत आत्मज्ञान से संपन्न हैं, जिससे इस जन्म के कारणभूत कर्म-बंधन मिट जाते हैं। वे ऐसे महान् हैं कि हमारे द्वारा यहाँ से भी नमस्कार करने योग्य हैं।
वहाँ ऐसी नदियाँ हैं, जिनमें कपटहीन उत्तम ब्राह्मणस्नान करते हैं। ऐसे आश्रम हैं, जिनमें वेद तथा प्राचीन शास्त्रों के ज्ञाता मुनि निवास करते हैं। ऐसे रत्नमय पर्वतशृंग हैं, जिनके मध्य मेघ विश्राम करते हैं। ऐसे स्थान हैं, जहाँ देवरूपधारियों के संगीत के लय-युक्त किन्नरवाद्य की तंत्रियों से उत्पन्न नाद से गजों तथा व्याघ्रों के बच्चे सो जाते हैं।
ऊँचे शिखरों से युक्त उस वेंकटाचल के निकट जाओ, तो तुम लोगों के सभी पाप मिट जायेंगे और मोक्ष प्राप्त कर लोगे। अतएव (उस पर्वत के निकट न जाकर) वहाँ से दूर हटकर जाना। फिर, वहाँ से आगे स्थित जल से समृद्ध 'तोंडे' देश में जाना। वहाँ खोजने के पश्चात् फिर, गंभीर गतिवाली, 'पोन्नि' नामक महिमान्वय शीतल जल से पूर्ण दिव्य कावेरी नदी के किनारे पर जाना।
तुम उस चोल देश में जाना, जहाँ (कावेरी नदी का) जल इतना स्वच्छ है, जितना स्वर्ग को प्राप्त किये हुए महात्माओं का मन होता है। जहाँ प्रारब्धकर्म से मुक्त पुरुष गुप्त रूप से निवास करते हैं। उसे पार करके तुम लोग सत्वर आगे बढ़ जाना और निद्राशील व्यक्ति किस परिणाम को पहुँचते हैं, उसका स्मरण करके वहाँ से हट जाना। फिर, रत्नमय पर्वतों से युक्त मलय देश में जाकर ढूँढ़ना। इसके पश्चात् विशाल तमिल देश—पाण्ड्यदेश में जाना।
दक्षिण में स्थित, तमिल देश में विशाल पोदिय नामक पर्वत है; जहाँ मुनिश्रेष्ठ (अगस्त्य) का तमिल-संघ है। वहाँ जाकर तुम मुनि के निरंतर आवासभूत उस पर्वत को नमस्कार करके आगे बढ़ना। फिर, सुन्दर जलधारा से युक्त ताम्रपर्णी नदी को पार करके