कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 524, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें| ५१६ | कंब रामायण |
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गजों के आवास बने ऊँचे सानुओ से शोभित महेंद्र पर्वत को एव दक्षिण के समुद्र को देखोगे।
उन स्थान को पार कर आगे जाना और वहाँ सर्वत्र खोजकर, एक मास की अवधि में तुम यहाँ लौट आना। अब तुम लोग शीघ्र विदा हो—(सुग्रीव के) इस प्रकार आज्ञा देने पर, त्रिविक्रम (के अवतारभूत राम) ने मारुति को कृपा-भरी दृष्टि से देखकर कहा—हे नीतिनिपुण ! सीता के लक्षण सुनो, जिनसे तुम्हें उनका अन्वेषण करने में सुविधा हो। फिर, आगे कहने लगे—
हे तात ! (सीता की) पादांगुलियाँ ऐसी हैं, मानो क्षीरसागर में उत्पन्न प्रवाल के खंडों में महावर लगाकर उनके उपरी भाग में अनेक चंद्रों को रख दिया गया हो। प्रसिद्ध कमल तथा अन्य पदार्थ भी उन पादों के उपमान नहीं बन सकते। इतना कहने के अतिरिक्त उन पादयुगल का उपमान क्या कहा जाय ?
हे तात ! जिस कच्छप को, बुद्धिमानों ने, कंकण-पंक्तियों से भूषित रमणियों के चरणों के ऊपरी भाग का उपमान बताया है, उससे रात्रिकाल की वीणा से भी अधिक मधुर बोलीवाली सीता के चरणों की उपमा देना उस (चरण-युगल) का अपमान करना है। इसे निश्चित जानो।
हे सत्यनिष्ठ ! चित्रकारों के लिए जिनके चित्र खींचना दुस्साध्य है, वैसे केश-पाशों से विशिष्ट उस देवी की जानुएँ ऐसी हैं कि बहुत सोच-विचार करने पर भी कोई उनका उचित उपमान नहीं पा सकता। विद्वान् लोग, गर्भिणी 'वराल' (नामक मछली), तूणीर, पुष्ट धानका गाभा,$^१$ इत्यादि को जानुओं के उपमान कहते हैं। ऐसा तो कोई भी कह सकता है। उसे पुनः मैं कहूँ, तो इसमें क्या रस है ?
केशपाश से सुशोभित सुन्दरियों की जाँघों के अति उत्तम उपमान बननेवाले जो कदली-वृक्ष हैं, वे भी जब उन (सीता की) जाँघों से परास्त हो गये हैं, तब उन जाँघों की अन्य उपमा क्या दी जाय ? वीणा की ध्वनि को, अमृत-समान मधु को और जल में पूर्ण खेतों में उत्पन्न ईख के रस को भी परास्त करनेवाली बोली से युक्त उस (सीता) की जाँघ इतनी सुन्दर है।
हे उत्तम ! कन्दुक-बद्ध, चक्रवाक एवं कलश-समान स्तनों से युक्त, 'वल्लि' लता-समान (पतली) कटिवाली उस (सीता) के, मेखला-भूषित, चक्राकार धृतारूत जघन-रूपी समुद्र का क्या उपमान हो सकता है—यह मैं तुम-जैसे को क्या कहूँ, जिसने समुद्रावृत धरती का सिर पर धारण करनेवाले आदिशेष के फन को देखा है तथा हिम को दबाकर ऊपर उठनेवाले, एक चक्रवाले (सूर्य के) रथ को भी देखा है ?
वह ऐसी है कि उसके आकार को देखकर ही (ब्रह्मा) अन्य किसी सुन्दरी का निर्माण कर सकता है। उसकी सूक्ष्म कटि के आकार का वर्णन यदि तुम सुनना चाहो, तो इसके लिए उपमान ढूँढ़ना व्यर्थ है। उस कटि को आँखों से नहीं देखा जा सकता है, केवल मैं हाथ के स्पर्श से ही उसे जान सकता हूँ। अन्य किसी उपाय से उसका स्पर्श करने के लिए सुकर ही नहीं है।
१. धान का पौधा, जिसमें से अभी-अभी बाली निकल रही हो, जानु का उपमान होता है।—अनु.