कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 62, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें| ४८ | कंब रामायण |
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लज्जाशील स्त्री का वध करना उपहास का कारण हो सकता है, (परन्तु) इस (ताड़का) का नाम लेने मात्र से पौरुषयुक्त बलवानों का सारा भुजबल नष्ट हो जाता है। फिर, पौरुष नामक गुण (इस ताड़का के अतिरिक्त) अन्यत्र कहाँ स्थित है ?
इंद्र इससे हार गया, असुर तथा स्वर्गवासी देवता इससे अपनी सेना के पराजित होने पर हारकर भाग गये ; यदि इसकी भुजाएँ मंदर पर्वत की तुलना करती हैं, तो पौरुष में, पुरुष और इसमें क्या अंतर है ?
राजाधिराज के प्रिय पुत्र (राम) । और एक वृत्तान्त तुमको सुनाना बाकी है, उसे भी सुन लो । प्राचीन काल में कभी ऐसा हुआ, इस प्रकार अनन्त तपस्यायुक्त विश्वामित्र कहने लगे --
भृगु नामक तपस्वी की मीन जैसे सुन्दर नयनोंवाली पत्नी ख्याति ने, बलवान् असुरों पर दया करके उन्हें छिपा रखा था और (उन्हें मारने के लिए दौड़कर उनके पीछे आनेवाले) चक्रपाणि विष्णु से उन्हें बचाया था, तब विष्णु ने उस नारी का वध किया था ।
देवाधिराज इंद्र ने अपने वज्रायुध से कुमति नामक स्त्री का वध किया था, जो देव-लोक तथा भू-लोक के सभी निवासियों को अपना आहार बनाती थी ।
स्त्री-हत्या के उस कार्य से विष्णु तथा इन्द्र को इतनी कीर्ति प्राप्त हुई, जिसका वर्णन हम नहीं कर सकते । उन्हें क्या किसी तरह का अपवाद मिला था ? हे पुष्पों की घनी माला पहने हुए (राम) ! तुम्हीं बताओ ।
अपने अत्यंत बलशाली शासन-चक्र से समस्त पृथ्वी पर राज्य करनेवाले सूर्यवंश में उत्पन्न गरिमामय (रामचंद्र) ! जिसने महात्माओं से विरोध किया, जिसने इस धरती के सहस्रों प्राणियों का वध किया और दृढ़तापूर्वक धर्म का विनाश किया, क्या उस ताड़का के लिए पौरुष (पुरुषत्व) गुण भी आवश्यक है ? (अर्थात् , इससे बढ़कर पुरुष कौन हो सकता है ?)
हे यम के समान भयंकर शूलधारी (राम) ! यम तो यह विचार करके ही कि प्राणियों का विधि-विहित जीवन-काल समाप्त हुआ या नहीं, उनके पुण्य कर्मों का भी खयाल करके, उन्हें अमरलोक में ले जाता है , परन्तु यह ताड़का तो प्राणियों की गंध पाते ही उन्हें खा डालने की इच्छा रखती है , भला क्या, इससे बढ़कर भी कोई दूसरा यम हो सकता है ?
हे प्रभो ! अनेक जीवित प्राणियों को एक साथ अपने मुँह में डालकर चबा जाने से बढ़कर अधम तथा कठोर कृत्य और क्या हो सकता है ? इस ताड़का को जूड़ा बाँधने-योग्य केशोंवाली तथा भोली-भाली स्त्री मानने से हमारी निर्बलता ही प्रकट होगी ।
शाश्वत धर्म का विचार करके ही मैंने तुम से (यह सब) कहा है, ऐसा मत समझो कि इस ताड़का के साथ द्वेष-भाव रखने के कारण मैं ऐसा कह रहा हूँ । तुम जो इस पर क्रोधरहित हो रहे हो, यह धर्म नहीं है । इस राक्षसी का संहार करो । —इस प्रकार मुनि ने (राम से) कहा ।
उन्होंने विश्वामित्र के ये वचन सुनकर कहा—हे सत्यस्वरूप ! यदि धर्म-विरुद्ध