कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 78, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें८० कम्ब रामायण
(विश्वामित्र ने) गंगा की कहानी कह सुनाई तो वे (राम और लक्ष्मण) सुनकर आश्चर्य और आनन्द में डूब गये। फिर, वे गंगा को पार कर विशाला नामक नगर में पहुंचे, जहाँ के पर्वत-सदृश भुजावाले नरेश ने उनका आदर-सहित स्वागत किया और (विश्वामित्र के) चरणों की वन्दना की। तीनों कुछ समय उस स्थान पर ठहरे और (फिर) आगे बढ़ चले।
वे तीनों मिथिला देश में जा पहुंचे जहाँ खेतों में अमरस कमलपुष्प खिल रहे थे। (जहाँ) खेतों की निगरानी में लगी हुई कृषक-नारियों के भाले-सदृश सुन्दर नेत्रों की, चंचल नयनों की परछाईं पानी में पड़ती थी, जिसे देखकर सारस पक्षी भ्रान्ति से उन्हें 'चपल' मीन समझ लेते थे और उन परछाइयों पर अपनी चोंच मारने लगते थे किन्तु मीन न पाकर लज्जित हो जाते थे।
[ नीचे विदेह देश के उद्यानों का वर्णन है। ]
(विदेह देश के) उद्यान कैसे हैं ? बाँध-बाँध अगरुवृक्षों के जलमार्गो से होकर जल बहता है, तो मृदंग-नाद होता है; अग्नि-सदृश अपने नवीन पुष्पों के रूप में उज्ज्वल दीप लिये खड़े हैं; ताड़ के सदृश मधु धारा बहानेवाले पुष्प-भरी लता में भ्रमर संगीत गाते हैं तथा मयूर अपने पंख फैलाकर नाचते हैं।
उद्यानों के खेतों में पदम-पुष्प के मध्य नीलकमल को देखकर कृषक भ्रांति से ... का मुख तथा नयन समझ लेते हैं और (उनसे) आकृष्ट हो उनके समीप जा ... किंतु पदम मणियों के बदले केवल पुष्प का आभास सीख उठते हैं और उन पुष्पों को उखाड़कर फेंक देते हैं। ऐसे उगाये गये पुष्प वहाँ बहुत-से पड़े हुए हैं।
उस प्रदेश की रूपवती स्त्रियाँ सरसोपमा जब मंदगति से चलती हैं, तब प्रवाल के समान उनके पाँवों में बजने वाले नूपुरों की ध्वनि को सुनकर उनके पीछे बक पड़ते हैं, वे समझती हैं कि पक्षी हमारा उपहास करते हैं, तब उनके मुखों का कुंकुम ढिग जल में मिल जाता है और जल-क्रीड़ा में उनके स्तनों के चन्दन का लेप पिघलकर बहकर छितरकर सुगन्धित करता है; तथा उस पानी में उतरने के पश्चात् स्त्रियाँ नीलकमल के समान नेत्रों तथा कमल के समान मुखों को सम्भालती हैं। वे तथा चंचल भँवरें उस समय एक-सी लगती हैं। जल में खिले हुए कमल के बिम्बों में बाल हैं, जिसे देखकर भँवरे उन मुखों को वास्तविक कमल नहीं मानते।
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