कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 80, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें६६ | कंब रामायण
वह अहल्या की संगति में सुगंधित नवमधु का महान् आनन्द पा रहा था, उसी समय अहल्या को अनुभव हुआ कि यह इन्द्र है, तो भी उसने उसे अनुचित कृत्य मानकर दूर नहीं किया उसी समय त्रिनेत्र (शिवजी) के समान सर्व-शक्तिमान् गौतम मुनि भी शीघ्र वहाँ लौट आये।
गौतम धनुर्वाण नहीं चला सकते थे, किन्तु प्रतिकार-रहित शाप देने में अत्यन्त समर्थ थे। उनको देखकर अमिट अपयश पाई हुई (अहल्या) भयभीत हो खड़ी रही, इन्द्र काँपता हुआ बिल्ली के जैसे वहाँ से धीरे-धीरे खिसकने लगा।
सदा तटस्थ दशा में रहनेवाले परिशुद्ध गौतम महर्षि ने अग्नि उगलती हुई आँखों से देखा वे सारी घटनाएँ समझ गये और तुम्हारे (राम के) वाणों के समान तीक्ष्ण वचन (इन्द्र के प्रति) कहे—'तुम्हारे शरीर में एक हजार नारियों के चिह्न-रूप अवयव उत्पन्न हों।' क्षण-मात्र में इन्द्र का शरीर उन अवयवों से भर गया।
इन्द्र सभी का उपहास-पात्र हो गया। अमिट अपयश लेकर वह लज्जित हुआ और वहाँ से चला गया। तब गौतम ने सुकुमारी अहल्या को देखकर कहा–'वारनारी के सदृश आचरण करनेवाली तुम पत्थर बन जाओ।' अहल्या पत्थर बनकर गिरने लगी।
(उस समय) उसने गौतम से प्रार्थना की कि हे अग्निमय रुद्र-समान मुनिवर! (छोटों के) अपराधों को क्षमा करना महान् व्यक्तियों का स्वभाव होता है। अतः, मुझे क्षमा करो और मेरे शाप का अंत कब होगा, बताओ।
तब गौतम ने कहा—भ्रमरों से घिरे पुष्पहार धारण करनेवाले दशरथ-पुत्र (श्रीरामचन्द्र) जब इस स्थान पर आयेंगे तब उनकी पद-रज का स्पर्श होते ही तुम्हारा उद्धार होगा।
शाप से विकृतांग इन्द्र को देखकर सभी देवता ब्रह्मा को अपने साथ लेकर गौतम मुनि के पास आये और उनसे प्रार्थना करने लगे। देवताओं की प्रार्थना सुनकर तपस्वी गौतम शांत हुए और इन्द्र के शरीर पर के सहस्र स्त्री-चिह्नों को सहस्र नयन बना दिये। अहल्या प्रस्तर के रूप में पड़ी रही।
हे मेघ-समान कांतियुक्त (रामचन्द्र)! प्राचीन काल में ऐसी घटना घटी थी। अब जब तुम भूतल पर अवतीर्ण हो गये हो इसलिए आगे सभी प्राणियों का उद्धार होगा, फिर क्या उनकी दुर्गति कभी संभव हो सकती है? कदापि नहीं।' यहाँ अंजन पर्वत की जैसी कान्ति से युक्त, जो युद्ध किया उसमें तुम्हारा हस्त-कौशल कैसा था, उस बाण चलाने वालों का श्रेष्ठ शिरोमणि है।