कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 95, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंबालकाण्ड ८३
विस्मय तथा आनन्द से भर गये। उन्होंने उन तपस्वी के चरणो की वन्दना की और वे उन्हें आशीष देकर अपने आवास को लौटे।
विश्वामित्र तथा लक्ष्मण जब अपनी-अपनी शय्या पर जाकर लेटे, तब रामचन्द्र किसी तमोमय फल के समान ऐसे रह गये कि वहाँ पर केवल निशा थी, चन्द्र था, एकान्त था, सीता ( की स्मृति ) थी तथा स्वयं राम थे।
( राम सोचने लगे ) कदाचित् कोई बिजली मेघ से अलग होकर नारी के सुन्दर रूप में आ उपस्थित हुई है। बहुत सोचने पर भी मै समझ नही पा रहा हूँ कि यह क्या है, क्या नही है ? उस रूप को मै अपने नेत्रों और मन में अंकित देख रहा हूँ।
उस सुन्दरी ( सीता ) के नयन उस क्षीरसमुद्र के जैसे प्रकाशमान हैं, जहाँ कालवर्ण विष्णु आदिशेष पर लेटे रहते हैं। अब वह सुन्दरी मेरे हृदय-रूपी कमल में आ विराजी है। अतः, कदाचित् वह पंकज-निवासिनी लक्ष्मी ही है।
यद्यपि मुझपर वह रमणी करुणाहीन है. तथापि मेरा मन उसपर मुग्ध हो गया है। उसने भयदायक काम-पीड़ा उत्पन्न करनेवाले अपने विष-सदृश नयनों से मुझे पी-सा लिया है, अतः अब मुझे इस ससार के सभी चर-अचर वस्तु-समूह उसी रमणी के सोने के रंग में अंकित-से दीखते हैं।
यद्यपि मैं अपने इस अभागे वक्ष से उस सुन्दरी के स्वर्ण-कलश-तुल्य स्तनों का—जहाँ पर आभरण स्पंदित होते रहते हैं—आलिंगन नही कर पाया हूँ, तथापि मैं सोचता हूँ कि क्या मै फिर उसकी उज्ज्वल चन्द्रिका जैसी हँसी को तथा उसके बिंबफल-तुल्य अधर को कभी देख सकूँगा ?
मनोहर मेखला से भूषित रथ-सदृश नितंब एक है, खड्ग-जैसे दो-दो नयन हैं दो पीन स्तन भी हैं तथा मुख पर अंकित मदहास भी एक है। हाय ! अपने पराक्रम में प्रख्यात यम-सदृश ( मुझे मारने के लिए ) क्या इतने आयुधों की आवश्यकता है ?
रसपूर्ण इक्षु को धनुष बनाकर और सुन्दरी को व्याज बनाकर यदि मन्मथ मुझ पर पुष्पबाणों की वर्षा करे तथा मुझे परास्त कर दे, तो अब शौर्य नामक गुण किसके पास बचेगा ?
यह चाँदनी ऐसी फैली है, मानो क्षीर-समुद्र का गंभीर जल ससार को निगलने के लिए उमड़ पड़ा हो। ज्यो-ज्यो मैं उस रमणी का स्मरण करता हूँ, त्यो-त्यो वह चाँदनी मेरे प्राणो को समूल उखाड़ने लगती है। क्या संसार में श्वेत रंग का विष भी होता है ?
क्या मेरा शुद्ध मन भी सन्मार्ग से हटकर अनैतिक मार्ग पर चल सकता है ? ( नही ) अब यदि यह मन इस नारी पर मुग्ध हुआ है, तो इसका कारण यही है कि वह चाशनी ( मिसरी ) जैसी मधुर बोलीवाली तथा सोने के रंगवाली बाला कुमारी ही है, इसमें कोई सन्देह नहीं है।
इतने में रात्रि व्यतीत हुई; चन्द्र पश्चिम समुद्र में डूब गया, मानो रात्रिकाल-रूपी राजा के मरने पर उसका उज्ज्वल श्वेतच्छत्र गिर गया हो, या पश्चिम दिशा-रूपी नारी के अति प्रकाशमान भाल पर रहनेवाला वर्तुल आभरण खो गया हो।