भारतकोश
कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

कान्हड़दे प्रबन्ध (कवि पद्मनाभ - जालोर चौहान वीरगाथा, अलाउद्दीन खिलजी से युद्ध व जौहर इतिहास)

Kanhadade Prabandha of Kavi Padmanabha with Commentary

कवि पद्मनाभ (सम्पादक: प्रो. कान्तिलाल बलदेवराम व्यास) द्वारा

DevanagariHindipublished354 पृष्ठ

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राजस्थान पुरातन ग्रन्थमाला कान्हडदे प्रबन्ध

तदूतणीकरतिवरवणी स्रीभंवतन०नरुधुईंथी मार मार मार माड सामहं सामसार जाउंकरणं चघणउ नगरथरी महुकफक्तविलीछिकरी. एउं एकविलेते नर मोडलितिहंतणा मसिउः ऊतलेति नि फ्तललेि दिणदिंन पंमोतेलिउरंगगंगसमान एउं विहफललेऊडतपकी विउली जेफल ऊरमददानी मिली जेफल सयरवचन गुंमांण तेफल ऊरुसंमातलि विगूयण. सुरि तेफल ऊरुतपसीश्वर त्रिंफक्त सबीदागसाद तिफलऊरुगयाप्रयागि गढ़साधुर कान्हडदे गंजि. शूं तेन तंगायणचीवनिहि जेहन क्रूदानअरुपंधी जेफल वारि माइसिमता नि फल ऊरुमलायां मसरी दू कान्हरूचरियकानानं वनि विरुदवरितिक्खउ येषुणि तरवरूवलि वि भं री चक्रयागजडिलिकारितिराणी फतुश्रास कवित्त मति करी ऊलयुगाकमोत्र लिनवू वि च अर्थखूसंमसर्माम्- यतुर्थखंडनमाध्मा जशुशो॥ सविमजनतनणी ॥ इति कान्हडदेचरित्राए... चं जीवीदीन का झकणदिवशी मास्ट सुला वदीनम् रटऊरूपदे संवताह६ घटंन पवातंब्रू सं० १५०॥ वर्षे का हिंकृवदिव थमाम् ण्ड तिसरपढी संवत् १४५२ पदमनावणंसित्तन मसंडरता

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