करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंकुछ कर रहा हूँ। मैंने तो साहिब के लिए कहा। अपना नाम लेना ही नहीं है । पता है, दुनिया डर रही है। खैर, अभी तो साहिब पर्दा करके चल रहा है । जिस दिन पर्दा हट जायेगा, सब साहिब में लय हो जायेंगे । लय हो जायेंगे सब। आपको ऐसे ही सब कुछ छोड़कर आने को नहीं कहा है। इसके पीछे कोई रहस्य है। तो फिर नाम-दान के समय आपसे एक चीज़ माँगूगा — विश्वास । विश्वास है क्या? आप कहेंगे- हाँ, है । इसी विश्वास के बदले आपको नाम दूँगा। याद रहे, इसी विश्वास के बल पर आपको पार करना है । इसलिए सही में करना विश्वास । विश्वास क्या-
गुरु को अखंड ब्रह्म कर माने । गुरु को नहीं मानुष कर जाने ।।
फिर मैंने आपसे आपका तन, मन, धन - तीनों लेने हैं; कहूँगा कि सच्चे दिल से आँख बंद करके दो । पता है, ये क्यों लूँगा ! क्योंकि ये तीनों ही आत्मा पर बीमारी है। आत्मा भूल से इन्हें मेरा-मेरा कह रही है । इसलिए—
तन मन दिया तो भल किया, सिर का जासी भार ।
जो कछु कहे सो मैं दिया, बहुत सहे शिर मार ।।
बस, आप आँख बंद करके सच्चे दिल से दे देंगे। यदि सच्चे दिल से नहीं देंगे तो समझ लेना कि मैं भी सच में नहीं लूँगा। तो जब आप अपना तन, मन, धन–तीनों मुझे सौंप देंगे तो फिर बाद में मैं आपका तन आपको वापिस कर दूँगा, कहूँगा—जाओ ! घर में माता-पिता होंगे, बाल-बच्चे होंगे, उनकी सेवा करना, पर आज से इसे मेरा मानकर कोई भी ग़लत काम नहीं करना । आप तो मुझे सौंप चुके होंगे, पर मैं आपको वापिस कर दूँगा। फिर इस तरह धन भी आपको वापिस कर दूँगा, कहूँगा कि इससे कोई ग़लत काम नहीं करना, किसी पर झूठा मुकद्दमा भी नहीं करना। फिर आपका मन मैं आपको वापिस नहीं करूँगा, कहूँगा कि इसे मेरे पास ही रखना । इसके बाद फिर आपको शीश पर अपना हाथ रखकर एक-एक करके कान में मंत्र दूँगा और आपकी आत्मा को उस एक पल में मन से अलग करके आज्ञा चक्र पर एकाग्र कर दूँगा । आपकी आत्मा को अपने में समाहित करके फिर छोड़ दूँगा। इससे जो गुरु - अंश आपके साथ टच हो जायेगा, वो कभी समाप्त नहीं होने वाला । नाम रूप में साहिब खुद साथ खड़ा हो जायेगा ।