भारतकोश
करूँ जगत से न्यार

करूँ जगत से न्यार

Karun Jagat Se Nyaar

सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)

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हमारा पंथ क्या है

‘साहिब' परम-पुरुष को कहते हैं और 'बंदगी' प्रणाम का पर्यायवाची सूचक है। इस तरह उस परम - पुरुष को प्रणाम का दूसरा नाम ' साहिब - बंदगी' है । साहिब बंदगी पंथ कोई कबीर पंथ नहीं है । यह संत - मत भी नहीं है। संत-मत इसलिए नहीं है कि कबीर साहिब से नाम लेने से पहले सभी काल-पुरुष की भक्ति ही तो कर रहे थे । इसलिए उनकी वाणी में काल - पुरुष की भक्ति से संबंधित शब्द भी हैं, जिन्हें पढ़कर भक्त लोग भ्रमित हो जाते हैं। और संकलनकर्ता कोई संत तो है नहीं कि सत्य - भक्ति से संबंधित शब्द छाँटकर अलग कर सके। तो दूसरा हम कबीर पंथी भी नहीं हैं। वर्तमान में जितने भी कबीर पंथी हैं, वो साहिब की मूल शिक्षा पर चल ही नहीं रहे हैं, भूल चुके हैं। काल-पुरुष सबको उलझा देता है। कईयों में ऐसा है कि दीक्षा हमसे लो पर गुरु कबीर साहिब को मानो । कबीर साहिब यह कहकर नहीं गये कि मेरी भक्ति करना। वो तो सद्गुरु की भक्ति के लिए बोल गये । वास्तव में मुझे कबीर साहिब की वाणी को लेने की ज़रूरत भी नहीं है। यह तो मैं मजबूरी में उदाहरण के लिए, अपनी बात का प्रमाण देने के लिए ले रहा हूँ, क्योंकि मैं जो बोल रहा हूँ, वो अनुभूति की बात कर रहा हूँ, आँखों देखी बात कर रहा हूँ जबकि बहुत से महात्मा द्वारा कबीर साहिब की वाणी को तो कई जगहों से तोड़-मरोड़कर मनमाने ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है । इसलिए यदि आप कबीर साहिब की वाणी को ही पढ़ेंगे तो भी भ्रमित हो जायेंगे। क्योंकि शुद्धता नहीं रह गयी है। मैं आपके सामने शुद्ध अध्यात्म पहुँचा रहा हूँ। इसलिए आपको कबीर साहिब या संतों की वाणी के गिर्द न घुमाकर अपने गिर्द ही घुमा रहा हूँ। एक ने कहा कि आप निरंकारी भी नहीं हैं, राधा स्वामी भी नहीं हैं, जैनी भी नहीं हैं, मुसलमान भी नहीं हैं, फिर मामला क्या है ? फिर क्या हैं? मैंने कहा कि यह फ़िलासफ़ी समझने में बड़ा समय लग जायेगा । किसी को इस्लाम समझाना हो तो कुरान आगे रख दो, समझ जायेगा। हिंदू धर्म समझाना हो तो बता दिया जाता है कि त्रिदेव हैं । ईसाई धर्म समझाना हो तो क्राइस्ट का