करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसंदेश दे दो। पर किसी को साहिब बंदगी समझाना हो तो पसीना छूट जाता है। इसलिए आप परेशान हो जाते हैं। मैंने समझा दिया है आपको। आपके बस की बात नहीं है । पहले जितने भी आए, काल की भक्ति कही । हम ऋषि-मुनियों के उदाहरण नहीं दे रहे हैं। क्योंकि उन्होंने तो काल की बात की है। हमारी फ़िलासफ़ी तो ऐसी है कि एक छोटा-सा लड़का गाता फिरता है— 'मुझे अपने ही रंग में रँगदा फिरे, साहिब अपने ही रंग में रँगदा फिरे ॥' जो कह रहे हैं कि किसी को नहीं मानता, ठीक कह रहे हैं । हम मीराबाई की फ़िलासफ़ी पर नहीं हैं। क्योंकि उन्होंने तो पहले सगुण भक्ति की है, सगुण पद भी गाए हैं। बाद में जब रविदास जी से दीक्षा तो सत्य - भक्ति में आई। तो पहले वाला कोई पढ़ेगा तो कहेगा कि एक ही बात है। हम अंतर ठीक से समझायेंगे । पलटू साहिब भी पहले निरंजन के दायरे में घूम रहे थे। गुरु नानक देव स्वयं ओंकार की उपासना कर रहे थे। बाद में साहिब से नाम लिया । और दसवें द्वार से भी आगे बोल दिया। हम एक को बॉयकाट नहीं कर रहे हैं । उसकी वाणी पर चलो, यह नहीं कह रहे । जो लोग कह रहे हैं कि किसी को नहीं मानता, वो ठीक ही कह रहे हैं। कबीर साहिब की फ़िलासफ़ी पर चलना, यह भी नहीं कह रहा हूँ। समय के साथ लोगों ने उनकी वाणी को इतना तोड़-मरोड़ दिया है कि कुछ कहते नहीं बनता । भ्रमित हो जाता है इंसान। सबने अपनी बात बीच में मिला दी है। अपनी सुविधाओं के अनुसार लिख दिया है। इसलिए मैं जो आपके पास पहुँचा रहा हूँ, वो शुद्ध है। एक माई ने कहा कि 'साहिब' (परम-पुरुष) को मेरे लिए कहना कि मेरा कष्ट दूर करे। मैं पूछना चाहता हूँ कि वो फाल्ट में थी कि नहीं ! एक ने कहा कि जब ध्यान में बैठती हूँ तो कभी आपके गुरु जी आ जाते हैं, कभी कबीर साहिब आ जाते हैं। मैंने कहा—माई, तू तीन किश्तियों पर क्यों खड़ी है ! आपने मेरे गुरु से क्या लेना है ! आपको कबीर साहिब से क्या लेना है! आपको तो मुझसे काम होना चाहिए, केवल मुझसे । 'मुझे है काम सतगुरु से....' वो कबीर साहिब अपनी शरण नहीं बता गया; सारा भार गुरु को सौंप गया। कहा-