करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 104, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंगुरु मानुष कर मानते, चरणामृत को पान ।
ते नर नरकै जायेंगे, जन्म जन्म होय स्वान॥
मेरे गुरुदेव मेरे गुरुभाइयों को बोल गये कि इन्हें ही गुरु मानना मेरे जाने के बाद, क्योंकि मैं अब अपने बिंदू पर जा रहा हूँ। तो हम सद्गुरु फ़िलासफ़ी पर चल रहे हैं ।
गुरु आज्ञा ले आवही, गुरु आज्ञा ले जाहीं ।
कहैं कबीर ता दास को, तीन लोक डर नाहीं ॥
हम कह क्या रहे हैं, यह समझो । गुरु ताक़त देता है; उसी से पार हो सकते हैं। मेरी वाणी में कमाई की बात नहीं मिलेगी । सेवा करो, यह भी नहीं कह रहा हूँ। जैसे किसान ने बीज बोया तो बहुत बड़ा काम हो गया। जमीन को गोड़ित किया, सींचा। फिर समय समय पर खाद भी डालनी है, सींचते भी रहना है। इस तरह आगे भी देखना है । मैंने जो आपको देना है, दे चुका हूँ । अब तो गहन सत्संग द्वारा उलझनों से परे कर रहा हूँ। बस, एक व्यक्तित्व कबीर साहिब को ओवरटेक नहीं कर रहा हूँ। बाकी किसी की फ़िलासफ़ी पर नहीं चल रहे हैं। मगहर में किताबें मिल रही थीं तो मैंने कहा कि नहीं ख़रीदना। पर कुछ ने मेरे मना करने पर भी चुपके से ख़रीद लीं। उसमें तो ग़लत बताया गया है । बाद में लोगों ने अपने विचार उसमें मिला दिये हैं । उसमें बताया गया है कि कबीर ने आत्मा को ही सब कुछ कहा है; किसी सत्लोक की बात नहीं है । तो मैं आपको शुद्ध चीज़ दे रहा हूँ । माँ ने बेटे को जन्म दिया तो बाद में खिलाया, पढ़ाया, लाड़-प्यार देकर बड़ा किया। नाम-दान के समय मेरा काम ख़त्म नहीं हो गया। माँ को परवरिश करनी होती है। तो मैं इसलिए दौड़ता घूम रहा हूँ। रोज़ के 5-5 सत्संग दे रहा हूँ। इसलिए हमारी फ़िलासफ़ी है – सद्गुरु भक्ति । जो सत्लोक की बात कह रहे हैं, उनमें भी भ्रांतियाँ हैं । वो तो पढ़कर बोल रहे हैं। कोई कहे कि जम्मू शहर समुद्र के बीच टापू पर है तो जो जम्मू में रहने वाले हैं, उनको कैसा लगेगा ! ऐसे ही मैं जान जाता हूँ कि ये खुद नहीं गये हैं। मैं तो स्वर्ग जाना हो तो चला जाता हूँ, ब्रह्माण्ड में घूमता रहता हूँ । पर सच यह है कि मैं अपने से बाहर नहीं निकलना चाहता हूँ ।