करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 108, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंसबसे पहले हम तीन लोक से परे एक चौथे लोक (अमर-लोक) की बात कर रहे हैं । कबीर साहिब ने सबसे पहले इस अमर लोक का संदेश संसार को दिया। उन्होंने उस अद्भुत देश की बात कही, जिसकी ख़बर पहले किसी को नहीं थी। जैसे वैज्ञानिक लोग ब्रह्माण्ड के रहस्य जानने के इच्छुक हैं । वे नित्य नयी-नयी सूचनाएँ संसार को दे रहे हैं। इसी तरह साहिब ने भी संसार को एक अनुपम रहस्य दिया । उन्होंने ऐसे अद्भुत लोक की बात कही, जहाँ प्रलय नहीं है। यह तीन लोक तो प्रलय की सीमा में आ जाते हैं यानी इनकी एक निश्चिय अवधि है। जैसे हमारे शरीर की एक अवधि है, हर चीज की एक अवधि है । एक अवधि तक हमारा शरीर रहता है, फिर नष्ट हो जाता है । यानी इसकी एक सीमा है। इसी तरह हर चीज़ की एक सीमा है, पर हमारी आत्मा का किसी भी देश, काल या अवस्था में नाश नहीं होता । यह कभी नष्ट नहीं होती । जिस चीज की उत्पत्ति है, उसका नाश भी अवश्यंभावी है, पर हमारी आत्मा की उत्पत्ति नहीं, इसलिए यह नष्ट भी नहीं होती। यहाँ पर सोचो । यदि आत्मा अमर है तो इस आत्मा का देश या इस आत्मा का असली ठिकाना भी ऐसा होना चाहिए न, जिसका कभी नाश न हो, जो परम सत्य हो । क्योंकि—
सत्य सोई जो विनशे नाहीं ।।
यह तीन लोक काल - पुरुष का देश है । उसी ने सब जीवों को शरीर रूपी पिंजड़े में कैद करके रखा हुआ है। इसी तीन- लोक से परे जो अमर-लोक है, वहाँ परम-पुरुष का निवास है । सब संतों ने उसे साहिब नाम दिया है । परमात्मा नाम तो काल - पुरुष का है। गुरु नानक देव जी ने तो साफ़-साफ़ कह दिया— आठ अटा की अटारी मझारा, देखा पुरुष न्यारा । निराकार आकार न ज्योति, नहिं वह वेद विचारा । ओंकार कत्र्ता नहिं कोई, नहिं वहाँ काल पसारा। वो साहिब सब संत पुकारा, और पाखंड है सारा । सतगुरु चीन्ह दीन्ह यह मारग, नानक नजर निहारा । हम सब मुक्ति की बात करते हैं, पर हमें पता नहीं है कि हम मुक्ति क्यों चाहते हैं। वास्तव में जिस संसार में हम रह रहे हैं, वो काल - पुरुष का संसार है। यहाँ पर आत्मा को दुख ही दुख दिया जा रहा है। काल - पुरुष सब जीवों को कष्ट दे देकर तंग कर रहा है। इसलिए हम सब काल पुरुष की इस