करूँ जगत से न्यार
Karun Jagat Se Nyaar
सतगुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (उद्गम)
पृष्ठ 120, कुल 264 में से
संदर्भ में पढ़ेंमैंने कहा कि अफ़सोस है कि तुम किसी पंथ के प्रचारक होकर घूम रहे हो। तुम्हें किसने बताया कि आकाश तत्व शब्द है। नहीं, शब्द आकाश तत्व नहीं है। जो दो हाथों के बीच है, वो है आकाश तत्व । तुम वहीं रुकना । अपनी बात से फिसल नहीं जाना ।
दो बिन होय न अधर अवाजा ।।
आवाज दो के बिना होती नहीं । वायु और पृथ्वी के सम्पर्क से ध्वनि हुई । तुम्हें किसने बताया कि शब्द आकाश तत्व है। आकाश तत्व क्या है ? यूरोपियन ब्लैक मैटर पर रिसर्च कर रहे हैं। वो कह रहे हैं कि जीवन का आधार ब्लैक मैटर है, पर हम खोज कर रहे हैं कि कहाँ से आया यह। वो गप्पी नहीं हैं। 90 प्रतिशत ब्रह्माण्ड में ब्लैक मैटर बोल रहे हैं। यानी 10 प्रतिशत रोशनी है। वो ठीक कह रहे हैं । जहाँ तक सूर्य की किरणें जाती हैं, वहाँ तक रोशनी है, बाकी अँधकार है ब्रह्माण्ड में। जैसे आप घर में दीपक जलाकर रोशनी करते हैं तो एक सीमा तक ही उसका प्रकाश जाता है। ऐसे ही एक सीमा तक ही सूर्य का प्रकाश पहुँचता है। ...तो वो कह रहे हैं कि हम शोध कर रहे हैं। मैंने सोचा कि पूरी उम्र बेकार में ही गँवाओगे, मेरे पास आ जाओ, दो मिनट में बता दूँगा ।
जो ब्लैक मैटर है, वो है आकाश तत्व । पाँचों तत्व देखे जा सकते हैं।
पीलो रंग है धरती को, मीठो इसको स्वाद ।।
धरती का रंग पीला है और स्वाद है - मीठा ।
लाल रंग है अग्नि को, तीखो इसको स्वाद ।।
आग का रंग लाल है और स्वाद है तीखा ।
श्वेत रंग है जल को, खारो इसको स्वाद ।।
जल को स्वादहीन, रंगहीन कहते हैं । यह भूल है। कभी आप अनजा में भी कहते हैं कि पानी की तरह सफेद । जल का रंग सफेद है। इसका स्वाद है— खारा ।
नीलो रंग है वायु को, खट्टो इसको स्वाद ।।
हवा का रंग नीला है और स्वाद है - खट्टा । नीला आकाश कह रहे हैं । यह वायु तत्व है। नज़दीक से नहीं दिखता है।
कालो रंग आकाश को, फीको इसको स्वाद ।।